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पोल खोल : क्या महाराष्ट्र में ‘तड़ीपारी कानून’ अब ‘पुलिसिया और राजनीतिक हथियार’ बन चुका है?

पोल खोल : क्या महाराष्ट्र में ‘तड़ीपारी कानून’ अब ‘पुलिसिया और राजनीतिक हथियार’ बन चुका है?

मुंबई : महाराष्ट्र में तड़ीपारी कानून का नाम सुनते ही एक अजीब सा ख्याल आता है—क्या यह कानून समाज में शांति बनाए रखने के लिए था, या अब इसका इस्तेमाल एक ‘पुलिसिया और राजनीतिक हथियार’ के रूप में हो रहा है? इस खास कॉलम में हम तड़ीपारी कानून के असली उद्देश्य और इसके दुरुपयोग पर चर्चा करेंगे। क्या है तड़ीपारी कानून? तड़ीपारी कानून का उद्देश्य अपराधियों और समाज के लिए खतरा बन चुके तत्वों को शहर या जिले से निष्कासित करना था। महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 की धारा 55 से 57 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को ‘समाज के लिए खतरा’ माना जाता है, तो उसे तड़ीपार किया जा सकता है। मगर इसका व्यावहारिक उपयोग अक्सर सवालों के घेरे में आता है। यह कानून पहले समाज के असामाजिक तत्वों को दूर रखने के लिए था, लेकिन अब इसका उपयोग राजनीतिक बदला लेने, व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने, और कभी-कभी निर्दोषों को सजा देने के लिए क