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स्कूली बच्चों को यौन-शोषण और स्वस्थ संबंध समझाएं

मुंबई, मुंबई उच्च न्यायालय ने बुधवार को महाराष्ट्र सरकार को यौन शोषण को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए स्कूलों में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। न्यायमूर्ति नरेश पाटिल और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की खंडपीठ ने कहा कि पांचवीं कक्षा से ऊपर के छात्रों के लिए इस तरह का अभियान चलाया जाना चाहिए, ताकि ‘स्वस्थ्य संबंधों’, ‘यौन शोषण’ जैसे विषयों को लेकर उनकी जागरूकता बढ़ाई जा सके।

पुरुषों को भी समझाओ : इससे पहले, महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग ने उच्च न्यायालय से कहा था कि वह कार्यस्थल पर यौन शोषण की घटनाओं को रोकने तथा जागरूकता के प्रसार के लिए कॉलेजों और राज्य सरकार के कार्यालयों में समय-समय पर अभियान चलाता रहा है। पीठ ने कहा, ‘सुनिश्चित करें कि आपके अभियानों एवं कार्यक्रमों में पुरुष भी हिस्सा लें। अक्सर घरेलू हिंसा एवं इस तरह के मामलों में पुरुष गुनाहगार होते हैं। इसलिए आप अपने अभियानों में पुरुषों-बेटों, पिताओं एवं पतियों-को आमंत्रित करें, ताकि वे समझें कि उन्हें कैसे पेश आना चाहिए’।

ताकि वे सभ्य नागरिक बनें : खंडपीठ ने कहा कि ‘साथ ही पांचवीं कक्षा से ऊपर के स्कूली बच्चों एवं किशोरों के लिए भी अभियान चलाएं ताकि वे आगे सभ्य व्यस्क बनें। वे स्वस्थ संबंधों के मायने समझें, उन्हें यौन-शोषण की घटनाओं की जानकारी हो और उन्हें पता हो कि किस तरह से व्यवहार करना है’।

आयोग की रिक्तियों के लिए याचिका : अदालत ने ये निर्देश कार्यकर्ता विहार दुर्वे द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। वकील नारायण बुबना के जरिए दायर की गई याचिका में मांग की गई कि आयोग को उसकी सभी रिक्तियां भरने का, राज्य के छोटे जिलों एवं ग्रामीण इलाकों में शाखाएं खोलने का निर्देश दिया जाए, ताकि महिलाओं के लिए उस तक पहुंचना सुगम हो।

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