
आमदार से निर्माण के लिए 16 लाख मंजूर, फिर भी मंदिर निर्माण पर रोक!
ट्रस्ट पदाधिकारियों पर बिल्डर से कथित समझौते का आरोप
बिल्डर हयात अंसारी के ‘ग्रीन एकर्स’ प्रोजेक्ट को लेकर बढ़ा विवाद
मुंबई । मलाड पूर्व स्थित संजय नगर, वाघेश्वरी माता मंदिर रोड पर बने ओम जय अंबे शिव हनुमान मंदिर को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। मंदिर निर्माण के लिए आमदार राजहंस सिंह के फंड से करीब 16 लाख रुपये मंजूर होने के बावजूद निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ने और अब मंदिर को उसकी मौजूदा जगह से हटाकर एक गाले में स्थानांतरित किए जाने के आरोपों ने स्थानीय श्रद्धालुओं में नाराजगी पैदा कर दी है।
जय श्री राम मित्र मंडल के अध्यक्ष जितेंद्र गौड़ के नेतृत्व में स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं ने मंदिर के निर्माण और कथित स्थानांतरण के खिलाफ विरोध शुरू किया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिल्डर हयात अंसारी के ‘ग्रीन एकर्स’ प्रोजेक्ट को लेकर मंदिर की मौजूदा जगह पर दबाव बनाया जा रहा है और मंदिर को उसके वर्तमान धार्मिक स्थल से हटाकर एक गाले तक सीमित करने की कोशिश की जा रही है।
जितेंद्र गौड़ ने ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों पर हयात अंसारी से कथित रूप से समझौता करने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मंदिर कोई साधारण जगह नहीं है, बल्कि वर्षों से भगवान शिव, हनुमानजी और अन्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना का केंद्र रहा है। ऐसे में विकास परियोजना के नाम पर मंदिर को उसकी मूल जगह से हटाकर एक छोटे से गाले में समेटना श्रद्धालुओं की आस्था के साथ अन्याय है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर मंदिर निर्माण के लिए सरकारी फंड मंजूर किया गया था, तो उसी स्थान पर मंदिर के विकास का रास्ता क्यों नहीं अपनाया गया। इसके बजाय मंदिर को हटाने की कथित कोशिश ने बिल्डर के ग्रीन एकर्स प्रोजेक्ट की भूमिका को लेकर भी गंभीर संदेह और नाराजगी पैदा कर दी है।
जितेंद्र गौड़ के मुताबिक जय श्री राम मित्र मंडल के कार्यकर्ता और स्थानीय श्रद्धालु वर्षों से अपने निजी खर्च से मंदिर परिसर की व्यवस्था संभालते रहे हैं। मंदिर में पतरा लगवाने से लेकर नल, पानी की टंकी और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था तक स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर की है। ऐसे में अब उसी मंदिर को उसकी जगह से हटाकर गाले में सीमित किए जाने की कोशिश को श्रद्धालु किसी भी कीमत पर स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं।
स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि बिल्डिंग प्रोजेक्ट और विकास के नाम पर आस्था के केंद्र को खत्म या सीमित नहीं किया जा सकता। किसी भी निर्माण परियोजना की कीमत श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और वर्षों पुरानी पूजा-स्थली को नहीं चुकानी चाहिए।
हयात अंसारी के ग्रीन एकर्स प्रोजेक्ट को लेकर उठ रहे इन आरोपों ने बिल्डर और मंदिर के बीच चल रहे विवाद को और गंभीर बना दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन विकास के नाम पर धार्मिक स्थल की पहचान और अस्तित्व को कमजोर करना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
जितेंद्र गौड़ ने भी स्पष्ट किया है कि मंदिर को गाले तक सीमित करने का फैसला मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो जय श्री राम मित्र मंडल और स्थानीय श्रद्धालु इस मामले को कानूनी स्तर तक ले जाएंगे और मंदिर के अस्तित्व तथा उसके मूल स्थान को बचाने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे।
फिलहाल इस पूरे विवाद में 16 लाख रुपये के मंजूर फंड, मंदिर के कथित स्थानांतरण और ग्रीन एकर्स प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों ने मामला गरमा दिया है। श्रद्धालुओं की मांग है कि मंदिर को उसकी मौजूदा धार्मिक पहचान और स्थान के साथ सुरक्षित रखा जाए तथा किसी भी कथित समझौते के बजाय मंदिर निर्माण और विकास को प्राथमिकता दी जाए।इस मामले में जब हमने बिल्डर से संपर्क करके प्रतिक्रिया लेके की कोशिश की तो संपर्क नहीं हो सका।
