सदस्यों ने किया धरना प्रदर्शन
17 वर्षों से घर और किराए के लिए लोगो का संघर्ष
DGS रियल्टी फिर घिरा विवादों में
पूर्व नगरसेवक विनोद मिश्रा ने दिया कानूनी लड़ाई में साथ देने का आश्वासन
मुंबई। गोरेगांव पूर्व स्थित जनरल अरुण कुमार वैद्य मार्ग, वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे के पास पद्मावती नगर कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के सदस्यों ने अपने घर और सोसायटी की जमीन का कब्जा वापस मिलने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन किया। सदस्यों का आरोप है कि वर्षों से पुनर्विकास का मामला अटका हुआ है, उन्हें किराया नहीं मिल रहा है और कोर्ट के आदेश के बावजूद उन्हें अपनी जगह का शांतिपूर्ण कब्जा नहीं मिल पाया है। धरने के दौरान सदस्यों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और संबंधित पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों की नाराजगी का एक कारण डीजीएस रियल्टी का नाम भी रहा, जिसे सदस्यों ने इस विवाद में नए सिरे से जुड़ा हुआ बताया।
दरअसल, पद्मावती नगर सोसायटी की पुरानी इमारत काफी जर्जर हो चुकी थी और उसके पुनर्विकास का फैसला लिया गया था। इसी प्रक्रिया में सितंबर 2012 में सोसायटी और विराज प्रॉपर्टीज के बीच डेवलपमेंट एग्रीमेंट हुआ और डेवलपर को पुनर्विकास की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद भी परियोजना में अपेक्षित गति नहीं आई। उपलब्ध हाई कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार, सोसायटी की पुरानी इमारत गिरा दी गई थी, लेकिन उसके बाद भी पुनर्विकास की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
इमारत टूटने के बाद सोसायटी के सदस्यों की परेशानी और बढ़ गई। सदस्यों का कहना है कि वे वर्षों से अपने घर की प्रतीक्षा कर रहे हैं और इस दौरान उन्हें किराए का भुगतान भी नहीं मिला। समय बीतने के साथ सदस्यों ने विराज प्रॉपर्टी डेवलपर से अपनी सहमति वापस लेने और विराज प्रॉपर्टी डेवलपर की नियुक्ति समाप्त करने की मांग करने लगा। कोर्ट के रिकॉर्ड में भी दर्ज है कि 2025 में बड़ी संख्या में सदस्यों ने नियुक्त विराज प्रॉपर्टी डेवलपर से पुनर्विकास के लिए अपनी सहमति वापस ली थी।
इसके बाद मामला हाई कोर्ट तक पहुंचा। सोसायटी की ओर से यह आरोप लगाया गया कि डेवलपर को समाप्त किए जाने के बाद भी साइट पर उसका अवैध कब्जा बना हुआ है और सदस्यों को अपनी जमीन का खाली और शांतिपूर्ण कब्जा नहीं मिल रहा है। दूसरी ओर, डेवलपर की ओर से अपने खर्च और अन्य विवादों का हवाला दिया गया। हाईकोर्ट ने 25 अगस्त 2026 के आदेश में विराज प्रॉपर्टी डेवलपर को चार सप्ताह के भीतर अपनी मशीनरी, सामान और सुरक्षा कर्मचारियों को हटाकर सोसायटी की संपत्ति का खाली कब्जा सोसायटी को देने का निर्देश दिया। आदेश में संपत्ति पर तीसरे पक्ष के अधिकार या हित पैदा करने से रोकने से संबंधित निर्देश भी दिए गए।
इसी बीच सोसायटी की ओर से अब एक और महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने की बात सामने आई है। सदस्यों के अनुसार, कोर्ट के आदेश के बाद जनरल बॉडी की बैठक आयोजित की गई, जिसमें 75 प्रतिशत से अधिक सदस्यों की वोटिंग के आधार पर Navkarmik Infra Development Pvt. Ltd. को नया डेवलपर चुनने का निर्णय लिया गया। सोसायटी के सदस्यों का कहना है कि उन्होंने अपने पुनर्विकास को आगे बढ़ाने के लिए नया डेवलपर चुन लिया है, लेकिन इसके बावजूद जमीन के कब्जे का विवाद समाप्त नहीं हुआ है।
सदस्यों का आरोप है कि पूर्व डेवलपर विराज प्रॉपर्टीज की ओर से तीसरे पक्ष को जोड़ने या जॉइंट एग्रीमेंट जैसी व्यवस्था के जरिए मामले को और उलझाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि जब सोसायटी ने नया डेवलपर चुन लिया है और हाई कोर्ट ने भी तीसरे पक्ष के अधिकार पैदा करने पर रोक से संबंधित निर्देश दिए हैं, तो इसके बावजूद साइट का कब्जा नहीं मिलना गंभीर सवाल खड़े करता है। इन्हीं आरोपों को लेकर प्रदर्शनकारियों ने विराज प्रॉपर्टीज और उससे जुड़े लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए।
इसी विवाद में अब DGS Realty का नाम भी सोसायटी के सदस्यों की नाराजगी का कारण बना हुआ है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि डीजीएस रियल्टी इस पूरे मामले में तीसरे पक्ष के तौर पर जुड़कर विवाद को और पेचीदा बना रही है और विराज प्रॉपर्टीज से जुड़े अधिकारों के आधार पर साइट पर नियंत्रण बनाए रखने की स्थिति पैदा हुई है। सदस्यों ने आरोप लगाया कि जब सोसायटी अपने नए डेवलपर का चुनाव कर चुकी है, तब भी उसे अपनी जमीन का कब्जा नहीं मिल रहा है। प्रदर्शन के दौरान डीजीएस रियल्टी के खिलाफ भी नारेबाजी हुई और सदस्यों ने साफ कहा कि वर्षों से घर के लिए इंतजार कर रहे लोगों के अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और लोगो का आरोप है कि डीजीएस रियल्टी अपने राजनीतिक संबंधों का फायदा उठाकर इस मुद्दे को अपने हित में लाना चाहती है। इन आरोपों पर डीजीएस रियल्टी और विराज प्रॉपर्टीज का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
आंदोलन के दौरान हमारे पत्रकार से बातचीत करते हुए सोसायटी के सदस्य श्री पिंगले ने बताया कि वे करीब 17 वर्षों से अपने घर और अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 25 अगस्त 2026 को हाई कोर्ट का आदेश आने के बाद निर्धारित अवधि पूरी होने पर जब सोसायटी के सदस्य अपनी जगह का कब्जा लेने पहुंचे, तब भी उन्हें कब्जा नहीं दिया गया। पिंगले ने आरोप लगाया कि पूर्व डेवलपर की ओर से बीएमसी को कथित रूप से गलत जानकारी देकर इमारत गिराने की कार्रवाई कराई गई, जिसके बाद से सदस्य लगातार परेशान हैं। उन्होंने बताया कि सोसायटी में कुल करीब 80 सदस्य हैं और 75 प्रतिशत से अधिक सदस्य उनके साथ होने का दावा किया गया है, जबकि विराज डेवलपर्स के साथ केवल कुछ सदस्य होने की बात कही जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्षों से किराया नहीं मिलने के कारण सदस्य आर्थिक परेशानी झेल रहे हैं। साथ ही उन्होंने सोसायटी के सेक्रेटरी राजेश मिश्रा के कामकाज और आर्थिक लेन-देन की जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
इसी दौरान सोसायटी की पदाधिकारी डॉ. माधुरी न्यायाधीश ने हमारे पत्रकार से बातचीत में कहा कि सोसायटी के सदस्य लंबे समय से अपने घर और अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों बीत जाने के बावजूद सदस्यों को अब तक उनका घर नहीं मिल पाया है और पुनर्विकास की प्रक्रिया में हुई देरी का सीधा असर परिवारों पर पड़ा है। उनका कहना है कि अब जबकि मामला न्यायालय तक पहुंच चुका है, सोसायटी के सदस्यों को उम्मीद है कि कोर्ट के आदेश का पालन होगा और उन्हें उनकी जगह का वास्तविक कब्जा मिल सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी स्तर पर सदस्यों के अधिकारों या सोसायटी के हितों से जुड़ी कोई अनियमितता हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
इसी दौरान पूर्व नगरसेवक विनोद मिश्रा धरना स्थल पर पहुंचे और उन्होंने सोसायटी के सदस्यों से बातचीत की। मिश्रा ने कहा कि यहां आने के बाद उन्हें पता चला कि ये लोग वर्ष 2012 से परेशान हैं और इन्हें किराया नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस सोसायटी में करीब 95 प्रतिशत मराठी भाई हैं, जो लंबे समय से अपने घर और अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मिश्रा ने यह भी कहा कि जिस बिल्डर को सोसायटी ने समाप्त कर दिया है, उसके अधिकार के आधार पर डीजीएस रियल्टी द्वारा जबरन कब्जा बनाए रखने का आरोप सामने आया है और इस स्थिति को कानूनी तरीके से चुनौती दी जानी चाहिए।
विनोद मिश्रा ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि वे फिलहाल धरना समाप्त करें और कोर्ट के आदेश की कथित अवमानना को लेकर दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाएं। उन्होंने सदस्यों को पुलिस थाने और संबंधित विभागों में भी लिखित शिकायत देने की सलाह दी। मिश्रा ने कहा कि यदि वहां से भी उन्हें मदद नहीं मिलती है, तो वे इस लड़ाई में उनके साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि न्याय और अधिकार की इस लड़ाई में वे सोसायटी के सदस्यों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे।
मिश्रा ने आगे कहा कि महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और उन्होंने सदस्यों को न्याय मिलने का भरोसा दिलाया। उनके इस आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारियों ने अपना धरना समाप्त कर दिया। अब सोसायटी के सदस्यों का कहना है कि वे कोर्ट के आदेश के पालन, जमीन के वास्तविक कब्जे और आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर संबंधित विभागों और अदालत का रुख करेंगे।
पद्मावती नगर सोसायटी का यह विवाद अब उस मोड़ पर पहुंच गया है जहां एक तरफ पुराने डेवलपर की नियुक्ति समाप्त होने, नए डेवलपर Navkarmik Infra Development Pvt. Ltd. के चयन और हाई कोर्ट के कब्जा सौंपने संबंधी आदेश का मुद्दा है, तो दूसरी तरफ विराज प्रॉपर्टीज, डीजीएस रियल्टी और कथित तीसरे पक्ष के समझौते को लेकर सदस्यों के आरोप हैं। आने वाले दिनों में अदालत, पुलिस और संबंधित विभागों के समक्ष होने वाली कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि सोसायटी के सदस्यों को उनकी जमीन का वास्तविक कब्जा कब मिलता है और 17 वर्षों से चले आ रहे इस पुनर्विकास विवाद का अगला रास्ता क्या होता है।
