नालासोपारा : नालासोपारा के नागिंदास पाड़ा इलाके में इन दिनों भारी तनाव और सन्नाटा पसरा हुआ है। एक तरफ जहां मानसून नजदीक है वहीं दूसरी तरफ नागिंदास पाड़ा के सैकड़ों परिवारों की रातों की नींद उड़ चुकी है। वसई-विरार महानगरपालिका द्वारा इलाके के लगभग 600 झोपड़ों और मकानों को दिए गए तोड़क कार्रवाई के नोटिस के बाद से स्थानीय लोगों में हाहाकार मचा हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे यहां पिछले कई दशकों से रह रहे हैं। उनके पास आधार कार्ड, बिजली बिल और तमाम सरकारी दस्तावेज हैं, फिर भी अचानक उनके आशियानों को अवैध बताकर खाली करने का फरमान सुना दिया गया है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, नागिंदास पाड़ा के इन 600 घरों को अवैध निर्माण और सरकारी या आरक्षित जमीन पर अतिक्रमण के दायरे में माना गया है। इससे राजनीतिक और सामाजिक बवाल खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि बिना किसी पुनर्वासन की व्यवस्था किए, सैकड़ों परिवारों को इस तरह सड़क पर नहीं फेंका जा सकता। स्थानीय लोगों की मांग है कि कम से कम मानसून के खत्म होने तक इस तोड़क कार्रवाई को टाल दिया जाए। पीड़ितों का कहना है कि यदि जगह खाली करानी ही है, तो सरकार उन्हें रहने के लिए कोई वैकल्पिक जगह मुहैया कराए। हालांकि, महानगरपालिका के अधिकारियों का कहना है कि यह नोटिस कानून के तहत और सुरक्षा के मद्देनजर दिए गए हैं। क्षेत्र में कानून-व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए भारी पुलिस बल की तैनाती की भी तैयारी की जा रही है।
नालासोपारा में मानसून से पहले तबाही की आहट… 600 घरों पर मंडराया बुलडोजर का साया
