Tuesday, August 25metrodinanktvnews@gmail.com, metrodinank@gmail.com

प्लास्टिक उत्पादकों को कोई राहत नहीं

मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट ने प्लास्टिक उत्पादकों को पाबंदी से कोई राहत देने से इनकार कर दिया. अदालत ने राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखते हुए 5 मई तक प्लास्टिक उत्पादकों से मिलकर उनकी बातों को सुनने और सुझावों पर गौर कर के आवश्यक परिवर्तन का निर्देश दिया. लेकिन अदालत ने आम आदमी को बड़ी राहत देते हुए 3 महीने तक दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी. अगली सुनवाई 8 जून को है. महाराष्ट्र सरकार ने 23 मार्च से राज्य में डिस्पोजल यानी कि इस्तेमाल कर फेंक देने वाले प्लास्टिक उत्पादों और थर्माकोल के उत्पादों पर पाबंदी लगा दी है जिसके तहत दंड का भी प्रावधान रखा गया है. हालांकि उत्पादकों और व्यापारियों को अपना माल ठिकाने लगाने के लिए पहले एक महीने का वक्त दिया गया था जिसे बाद में बढ़ाकर तीन महीने कर दिया गया था. अदालत ने शुक्रवार के अपने अंतरिम फैसले में आम नागरिकों को भी राहत देते हुए 3 महीने तक दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी.
महाराष्ट्र में प्लास्टिक पाबंदी के खिलाफ प्लास्टिक बैग उत्पादकों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में गुहार लगाकर अंतरिम राहत की मांग की थी. उनका तर्क था कि बिना पूर्व तैयारी और विकल्प के पाबंदी उचित नहीं है. इस पाबंदी के बाद से तकरीबन 4 लाख मजदूर बेकार हो गए और हर महीने 1500 करोड़ का नुकसान हो रहा है. जबकि सरकार ने तर्क दिया कि प्लास्टिक का इस्तेमाल ना सिर्फ पर्यावरण के लिए नुकसानदेह है बल्कि इंसान और जानवरों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है.
मामले में बुधवार 11 अप्रैल को बड़ी संख्या में प्लास्टिक उत्पादक और व्यापारी अदालत परिसर में जमा हुए थे. उन्होंने काला कपड़ा पहन रखा था और काले फीते भी बांध रखे थे. अदालत को ये बात बहुत नागवार गुजरी थी. न्यायधीश अभय ओक और रियाज़ छागला की पीठ उस बात से इतनी नाराज थी कि गुरुवार को याचिका पर फैसले के पहले याचिकाकर्ताओं से जवाब तालाब किया. अदालत चाहती थी कि वकील या फिर याचिकाकर्ता उसकी जिम्मेदारी ले लेकिन सभी ने भीड़ से अपना पल्ला झाड़ लिया.
अदालत ने याचिकाकर्ताओं और उनके वकीलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अगर कोई सोचता है कि भीड़ से वो अदालत को प्रभावित कर सकता है तो वो गलत है, उसकी याचिका खारिज की जा सकती है. बड़ी बात है कि अदालत ने वकीलों को भी इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और कहा कि इस तरह की गलत परंपरा को रोकें. अदालत ने उम्मीद जताई कि सभी 3 बार एसोसिएशन इसे गंभीरता से लेंगे और भविष्य में इस तरह की स्थिति ना हो.

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *