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आधार डेटा की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जताई गंभीर चिंता

नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को आधार मामले की सुनवाई के दौरान इसकी सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठे। इस बात की आशंका जताई गई कि आधार के लिए ली गई जानकारी कितनी सुरक्षित है? सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आधार डेटा लीक होने से चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार के लिए लिया जाने वाला डेटा सुरक्षित है, यह कहना मुश्किल है क्योंकि देश में डेटा सुरक्षा को लेकर कोई कानून मौजूद नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पांच जजों की संवैधानिक बेंच में मौजूद जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि मुख्य आशंका यह है कि आधार के लिए जो डेटा लिया गया है उस उपलब्ध डेटा से चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘अगर आधार डेटा का इस्तेमाल चुनाव नतीजों को प्रभावित करने में होगा तो क्या लोकतंत्र बच पाएगा।’ आपको बता दें कि अमेरिका के पिछले राष्ट्रपति चुनाव में फेसबुक डेटा का अवैध तरीके से इस्तेमाल होने का मामला खासा विवादों में रहा है। पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने 1 अरब 30 करोड़ लोगों के डेटा के गलत इस्तेमाल की आशंका को लेकर चिंता जाहिर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने सवाल करते हुए कहा कि देश में डेटा संरक्षण को लेकर कोई कानून नहीं है और ऐसे में अभी सुरक्षा को लेकर क्या उपाय हैं? मामले की सुनवाई के दौरान यूआईडीएआई के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि तकनीकी विकास हो रहा है और उसकी सीमाएं हैं। तब जस्टिस चंद्रचूड़ का कहना था कि हम वास्तविकता से आंख नहीं चुरा सकते क्योंकि कानून लागू करने जा रहे हैं और वह भविष्य प्रभावित करेगा। यूआईडीएआई की ओर से कहा गया कि ‘बायोमेट्रिक डेटा किसी के साथ शेयर नहीं किया जाता है। जिसका आधार है उसकी सहमति के बिना ये किसी को नहीं दिया जाता। हम सुनिश्चित करेंगे कि डेटा लीक नहीं हो लेकिन 100 फीसदी गारंटी तो नहीं हो सकती।’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यूआईडीएआई के लेवल पर डेटा लीक नहीं होता, ये हम मानते हैं लेकिन डेटा संरक्षण को लेकर कोई कानून नहीं है। अगर प्राइवेट हाथों से लीक होता है तो क्या होगा। हम इस बात को लेकर चिंतित हैं। बायॉमेट्रिक एक जगह पर स्टोर नहीं किया गया है। सिस्टम इंटरनेट से लिंक नहीं है। कोई भी संवेदनशील और व्यक्तिगत डेटा किसी भी तीसरे पक्ष से शेयर नहीं किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे पास कोई टूल नहीं है। हमारी चिंता सिर्फ काल्पनिक नहीं हैं बल्कि चिंता है कि ये असलियत में चिंता का विषय है। अगर व्यक्तिगत लोगों के डेटा का इस्तेमाल चुनावी रिजल्ट को प्रभावित करने में होने लगेगा तो क्या लोकतंत्र बच पाएगा। मामले की सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी।

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