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पुलिस मुख्यालय के नजदीक था दाऊद के ‘फरार’ साथी का ऑफिस

ठाणे
ठाणे के मुंब्रा परिसर में केबल व्यवसाय को लेकर हुए विवाद के चलते बीस साल पहले हुए दोहरे हत्याकांड के फरार आरोपी दाऊद गिरोह से जुड़े तारिक अब्दुल करीम परवीन को ठाणे पुलिस के हफ्तावसूली निरोधी दस्ते ने गिरफ्तार किया है। घटना की मुख्य बात यह है कि पिछले कुछ सालों से 51 वर्षीय तारिक मुंबई पुलिस मुख्यालय से लगे अशोका शॉपिंग सेंटर में अपना ऑफिस शुरू कर रखा था, लेकिन मुंबई पुलिस को इसकी कोई भनक नहीं थी। इस बात को लेकर ठाणे पुलिस महकमा में आश्चर्य बना है। हफ्तावसूली निरोधी दस्ते के प्रमुख प्रदीप शर्मा के मुताबिक तारिक एक वक्त दाऊद का दाहिना हाथ समझा जाता था और वह मुंबई के छोटा शकील के नाम से अंडरवर्ल्ड में जाना जाता था। वर्ष 1994 में तारिक के भाई जुबेर की हत्या दाऊद गिरोह से जुड़े छोटा शकील ने करवा दी थी और उसके बाद तारिक छोटा शकील के जरिए ही दाऊद गिरोह से जुड़ गया था। ठाणे न्यायालय ने तारिक को 1 अप्रैल तक की पुलिस हिरासत में भेजा है।

केबल व्यवसाय से हत्यारे तक का सफर
तारिक पहले मुंब्रा में रहता था और उसका केबल का व्यवसाय था। उक्त व्यवसाय में हुए विवाद के चलते उसने 31 अगस्त, 1998 के दिन मुंब्रा के किस्मत कालोनी में अब्दुल पटेल स्कूल के करीब मोहम्मद इब्राहिम बांगड़ीवाला और परवेज अंसारी पर अंधाधुंध गोलियां दाग कर हत्या कर दी थी। घटना के दौरान 13 वर्षीय रोशन आरा नामक एक छात्रा भी जख्मी हो गई थी। मृत मोहम्मद इब्राहिम बांगड़ीवाला के भाई की शिकायत पर मुंब्रा पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था। मामले में छह लोग पकड़े गए थे, लेकिन तारिक अब्दुल करीम परवीन फरार हो गया था। बाद ने पकड़े गए आरोपी मामले से छूट गए थे और लंबा अरसा बीतने के साथ उक्त मामला ठाणे पुलिस के ठंडे बस्ते में चला गया था।

दुबई से लाया गया, फिर जमानत पर छूटा
पिछले दिनों ठाणे हफ्तावसूली निरोधी दस्ते के प्रमुख प्रदीप शर्मा को तारिक के मुंबई में होने की खबर लगी थी, जिसके बाद उसे गुरुवार की आधी रात को उसके ऑफिस से पकड़ लिया गया। तारिक को पहले मुंब्रा पुलिस के हवाले किया गया और फिर आगे की छानबीन के लिए उसे हफ्तावसूली दस्ते ने अपनी हिरासत में लिया। शर्मा के मुताबिक तारिक दाऊद का बहुत खास था और गिरोह में उसकी पैठ छोटा शकील की तरह थी और वह दुबई में ही रहता था। तारिक को साल 2004 में दुबई से मुंबई लाया गया था और मुंबई पुलिस के हवाले किया गया था।

मुंबई उच्च न्यायालय से जमानत
तारिक 2008 तक जेल में था और फिर मेडिकल ग्राउंड पर उसे मुंबई उच्च न्यायालय से जमानत मिल गयी थी। जनवरी 2015 में आर्म्स ऐक्ट के तहत तारिक को यूपी एसटीएफ और दिल्ली स्पेशल सेल पुलिस ने संयुक्त रूप से मुंबई से गिरफ्तार किया था। एक माह बाद उसे लखनऊ न्यायालय से सबूतों के आभाव में छोड़ दिया गया था। उसके बाद से तारिक मुंबई में निर्माण कार्य का अपना व्यवसाय करने लगा था। मुंबई में बने दाऊद के सारा सहारा मार्केट मामले में भी तारिक गिरफ्तार हुआ था और उसे दस साल की सजा हुई थी, लेकिन बाद में वह उसमे जमानत पाने में सफल हो गया था।

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