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ज्यादा वोट शेयर के बावजूद बीजेपी को क्यों मिलीं कम सीटें?

अहमदाबाद
गुजरात विधानसभा चुनाव जितना दिलचस्प रहा, उसके नतीजों से जुड़े आंकड़े भी उतने ही रोचक हैं। शहरी, ग्रामीण, आरक्षित और अनारक्षित सीटों के हिसाब से देखें या फिर क्षेत्रवार, सभी जगहों पर कांग्रेस और बीजेपी का वोट शेयर और सीटों का आंकड़ा एक अलग ही पैटर्न पेश कर रहा है। आमतौर पर चुनावों में ऐसा कम ही देखने को मिलता है। चुनाव में जीत दर्ज करने वाली बीजेपी का वोट शेयर कांग्रेस से काफी ज्यादा रहापूरे प्रदेश की बात की जाए तो बीजेपी को 49.1% वोट मिले जो 2012 में मिले 47.9% वोट से ज्यादा हैं और इसकी तुलना अगर 2014 के लोकसभा चुनाव में मिले 59.1% वोट शेयर से की जाए तो पार्टी को खासा नुकसान हुआ है। कांग्रेस ने भी पिछले चुनाव के मुकाबले अपना वोट शेयर बढ़ाया है। पांच साल पहले पार्टी को 38.9% वोट मिले थे, जो इस चुनाव में बढ़कर 41.4% हो गए। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उन इलाकों में भी बीजेपी का वोट शेयर कांग्रेस से कुछ ज्यादा रहा, जहां कांग्रेस ने ज्यादा सीटें जीती हैं। मसलन ग्रामीण इलाकों की बात की जाए तो कांग्रेस का प्रदर्शन सीटों के हिसाब से तो अच्छा रहा, लेकिन वोट शेयर के मामले में बीजेपी ही आगे रही।ऐसे में सवाल यह है कि हर क्षेत्र में वोट शेयर कांग्रेस से बेहतर होने के बावजूद बीजेपी को बड़ी जीत क्यों नहीं मिली? बीजेपी बहुमत के आंकड़े से सिर्फ 7 सीटें ज्यादा जुटा पाई। इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि पार्टी ने शहरी क्षेत्रों की कई सीटों पर बड़े अंतर से जीत हासिल की। 33 शहरी सीटों पर बीजेपी उम्मीदवारों की जीत का औसत मार्जिन लगभग 47,400 रहा। इसी तरह ग्रामीण इलाकों में भी बीजेपी के उम्मीदवार औसत 26,000 वोटों से जीते। ऐसे में पार्टी को वोट तो खूब मिले, लेकिन उससे सीटें नहीं बढ़ीं।

दूसरी तरफ कांग्रेस उम्मीदवार जीते तो जरूर, लेकिन उनकी जीत का अंतर ज्यादा नहीं रहा। यही वजह है कि कांग्रेस उन इलाकों में भी बीजेपी से ज्यादा सीटें जीतने में कामयाब रही जहां उसका वोट शेयर बीजेपी से कम रहा। इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण है सौराष्ट्र, जहां बीजेपी को कांग्रेस की 30 सीटों के मुकाबले 23 सीटें मिलीं, जबकि उसका वोट शेयर (45.9%) कांग्रेस के वोट शेयर (45.5%) से कुछ ज्यादा ही रहा।इसी तरह का ट्रेंड उत्तर गुजरात में भी देखने को मिला। यहां बीजेपी का वोट शेयर 45.1% रहा जबकि कांग्रेस को 44.9% वोट मिले। फिर भी बीजेपी को 14 सीटें मिलीं और कांग्रेस को 17 सीटें। पटेलों की कथित नाराजगी को चुनाव में बड़ा मुद्दा बताया जा रहा था, लेकिन बीजेपी ने पाटीदारों की बहुलता वाली 28 सीटें जीतीं। हालांकि क्षेत्रवार बात करें तो इनमें से सिर्फ 9 सीटें सौराष्ट्र-कच्छ से आती हैं, जबकि कांग्रेस ने 23 ऐसी सीटें जीतीं जहां पटेल बड़ी संख्या में हैं और ये सभी सीटें सौराष्ट्र-कच्छ की हैं।

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