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सड़क के हक को लेकर भिड़े रेलवे और आईएसबीटी, विवाद बढ़ता देख बुलानी पड़ी पुलिस

नई दिल्ली
200 मीटर की तीन लेन सड़क रेलवे और आईएसबीटी के बीच विवाद का मुद्दा बन गई है। रेलवे अथॉरिटी और आईएसबीटी आंनद विहार इस सड़क को लेकर एक-दूसरे के सामने आ गई है। दोनों अथॉरिटी सड़क के इस्तेमाल और मालिकाना हक को लेकर अड़े हैं। वहीं यह मामला मंगलवार रात को इतना बढ़ गया कि बीच बचाव के लिए पुलिस को बुलाना पड़ा। यह सड़क आनंद विहार आईएसबीटी से 50 मीटर दूर चौधरी चरण सिंह मार्ग से शुरू होती और आनंद विहार रेलवे स्टेशन के पास खत्म होती है। इस सड़क को अभी पब्लिक के लिए खोला जाना है। बस टर्मिनल को ऑपरेट करने वाला दिल्ली ट्रांसपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट कॉर्पोरेशन (डीटीआईडीसी) इस सड़क को बस टर्मिनल के सेकंड ऐंट्री पॉइंट के तौर पर इस्तेमाल करना चाहता है। वहीं दूसरी तरफ रेलवे इस सड़क को रेलवे स्टेशन तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्ते के तौर पर इस्तेमाल करना चाहता है। हालांकि रेलवे ने यहां सड़क का निर्माण किया है, लेकिन डीटीआईडीसी का कहना है कि इस जमीन का मालिकाना हक उसके पास है, ऐसे में इस सड़क को इस्तेमाल करने का उसके पास अधिकार है। डीटीआईडीसी के अधिकारियों का कहना है, ‘जमीन का यह हिस्सा इस्तेमाल में नही आ रहा था और प्रदूषण का कारण बन रहा था। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने इन्वाइरनमेंट पलूशन प्रिवेंशन ऐंड कंट्रोल अथॉरिटी को नियुक्त कर निर्देश दिया कि बस टर्मिनल में प्रवेश के लिए वैकल्पिक रास्ते के तौर पर यहां सड़क का निर्माण किया जाए क्योंकि टर्मिनल का मेन ऐंट्री पॉइंट काफी भीड़भाड़ वाला है और वाहनों की वजह से प्रदूषण होता है। ऐसे में हम इस सड़क का इस्तेमाल अंतरराज्य बसों की ऐंट्री के लिए करना चाहते थे, जबकि फिलहाल जो रोड है, उसे सिर्फ दिल्ली की बसों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।’
मंगलार को डीटीआईडीसी वहां बनी बाउंड्री को खत्म कर बस टर्मिनल के लिए नया रास्ता निकालने की कोशिश की। रेलवे के अधिकारी और रेलवे प्रॉटेक्शन फोर्स के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और तोड़फोड़ रुकवाने की कोशिश की। इस बीच बात को बढ़ती देख डीटीआईडीसी ने पुलिस को मौके पर बुला लिया।
दिल्ली के डिविजनल रेलवे मैनेजर आरएन सिंह ने कहा कि डेमोलेशन को फिलहाल रूकवा दिया गया है। डीटीआईडीसी को बाउंड्री को तोड़ने से पहले आज्ञा लेनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, ‘हमने रोड बनाई है, लेकिन अब डीटीआईडीसी इस पर दावा कर रही है।’
डीटीआईडीसी के अधिकारी का कहना है, ‘रेलवे ने इस सड़क का निर्माण कराया है, लेकिन उन्होंने बगैर आज्ञा के 2000 स्क्वेयर मीटर सड़क का निर्माण कराया है, जबकि यह सड़क बस टर्मिनल के लिए है।’ उन्होंने कहा कि डीटीआईडीसी इस अतिक्रमण को लेकर केंद्र सरकार से बात करेगी

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