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‘धर्म’ करेगा ‘मर्म’ का इलाज, धार्मिक संस्‍थाएं शुरू करेंगी डायल‍िस‍िस सेंटर

मुंबई
हजारों किसानों की बेटियों की शादी कराने के बाद अब चैरिटी कमिशन राज्य में डायलिसिस केंद्रों को बढ़ाने पर जोर देगा। चैरिटी कमिश्नर द्वारा राज्य के सभी धार्मिक ट्रस्टों को किडनी मरीजों की बेहतरी के लिए हर जिले में कम से कम दो ऐसे डायलिसिस केंद्र शुरू करने में मदद करने का निर्देश दिया है, जहां मरीजों को नि:शुल्क डायलिसिस का लाभ मिल सके। चैरिटी कमिशन से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि राज्य में डायलिसिस की सीमित संख्या है, खासकर ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी चिंताजनक है। इसीलिए मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और गिरिजाघरों सहित राज्य के तमाम धार्मिक ट्रस्टों को निर्देश दिया गया है कि वह अपने ट्रस्ट से थोड़ा धन डायलिसिस केंद्रों के निर्माण के लिए दें। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में छोटे-बड़े मिलाकर 8-10 हजार धार्मिक ट्रस्ट हैं।

बढ़ रही मरीजों की संख्या
बदलती जीवनशैली के साथ ही लोगों में बीमारियां भी बढ़ रही हैं। किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. भरत शाह ने बताया कि किडनी के काम करने की स्थिति के अनुसार एक मरीज को महीने में कम से कम 2-3 बार डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। बता दें कि सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस की बढ़ती लाइन के कारण वहां अक्सर गंभीर मरीजों को ही डायलिसिस मिल पाती है।

केवल मुंबई में 3 हजार से अधिक की कतार
अंगदान को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी के कारण हर साल 3 हजार से अधिक लोग केवल मुंबई में किडनी प्रत्यारोपण के लिए इंतजार में रहते हैं। जोनल ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेश सेंटर (जेडटीसीसी) से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले अकेले मुंबई में 3,271 लोगों को किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत थी। इसमें से केवल 80 लोगों को ही यह इलाज मिल पाया, जबकि बाकी मरीजों को डायलिसिस पर रखा गया है।

चैर‍िटी कमिश्नर, महाराष्ट्र के शिवकुमार दिघे ने कहा, ‘राज्य में कई ऐसे गरीब मरीज हैं, जो डायलिसिस के लिए प्राइवेट अस्पतालों का खर्च वहन नहीं कर सकते। ऐसे में धार्मिक ट्रस्टों को निर्देश दिया गया है कि वे डायलिसिस केंद्रों के निर्माण में मदद करें।’

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