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पुलिस अधिकारी के घर छिपा रहा दाऊद का आदमी, डॉन ने भिजवाई थीं चांदी की सिल्लियां

मुंबई
करीब तीन दशक पहले अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम द्वारा भिजवाई गईं चांदी की ईंटों को लेकर पालघर के वडराई गांव के लोगों को बुरी तरह पीटा गया था, कुछ का कत्ल भी कर दिया गया था। दहशत इतनी थी कि फिल्म ‘शोले’ के गब्बर जैसा डर पूरे गांव में करीब एक साल तक रहा। उस केस के तमाम आरोपियों में से एक चंद्रकांत पाटील भी था। कांदिवली क्राइम ब्रांच ने सोमवार को चंद्रकांत को बोरिवली से गिरफ्तार किया है। खास बात यह है कि जिस पाटील की मुंबई पुलिस को इतने साल से तलाश थी, वह महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा से लगे बेलगांव में एक पुलिस अधिकारी के घर में ही रहता था। डीसीपी निसार तांबोली ने एनबीटी को बताया कि उन्होंने आरोपी को नालासोपरा पुलिस को सौंप दिया है। साल 2003 में नालासोपारा में राजेंद्र पतंगे नामक बिल्डर का मर्डर कर दिया गया था। उस केस में भी चंद्रकांत पाटील शामिल था।

हजारों चांदी की ईंटें थीं
1990 में दाऊद ने मिडिल ईस्ट से समुद्र के रास्ते चांदी की ईंटें भिजवाई थीं। जिस जहाज से ये ईंटें लाई जा रही थीं, वह पालघर के वडराई गांव में समुद्र के किनारे आते-आते पलट गया था। उस जहाज में हजारों चांदी की ईंटें थीं। हर ईंट का वजन 35 किलो से भी ज्यादा था। जैसे ही जहाज में चांदी की ईंटें होने की खबर पहुंची, गांव में काफी लोगों ने वे ईटें उठा लीं और अपने-अपने घरों में रख लीं।

उसके बाद दाऊद के लोगों ने वडराई गांव के लोगों को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। इन ईटों की वापसी के लिए गांव के लोगों को इतनी बुरी तरह मारा गया कि दो की मौत हो गई और एक ने खौफ में आकर खुदकुशी कर ली। गांव के लोगों की हत्या और प्रताड़ना में जो लोग शामिल थे, उनमें चंद्रकांत पाटील और एक पुलिस अधिकारी भी शामिल था। इस पुलिस अधिकारी का बेलगांव में फार्म हाउस है। मुंबई क्राइम ब्रांच सूत्रों का कहना है कि चंद्रकांत उसी के फार्म हाउस में ही रहता था।

राजन-दाऊद दोनों का दोस्त
चंद्रकांत पाटील मूल रूप से नालासोपरा का रहने वाला है। करीब एक साल पहले किसी ने एसीपी अभय शास्त्री और सीनियर इंस्पेक्टर चिमाजी आढाव को उसके मुंबई आने-जाने की टिप दी थी। कांदिवली क्राइम ब्रांच की टीम तब से उसे लोकेट करने की कोशिश कर रही थी। सोमवार को जैसे ही उसके बोरिवली होने की खबर मिली, इंस्पेक्टर शरद झीने और नितिन उतेकर ने उसे वहां घेरा।

इस तरह कई साल से फरार यह आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ ही गया। क्राइम ब्रांच सूत्रों का कहना है यह चंद्रकांत पाटील उस दौर से अंडरवर्ल्ड में है, जब दाऊद इब्राहिम व छोटा राजन एक साथ काम करते थे। बिल्डर राजन पतंगे के जिस मर्डर में उसे मंगलवार को नालासोपारा पुलिस की हिरासत में दिया गया है, उसमें छोटा राजन भी आरोपी है।

सुभाष सिंह ठाकुर के साथ वारदात
1990 के वडराई कांड के बाद वह दिल्ली में सुभाष सिंह ठाकुर के साथ टाडा केस में पकड़ा गया था। सुभाष सिंह ठाकुर को चर्चित जे. जे शूटआउट में आजीवन कारावास की सजा हुई है। फिलहाल वह नैनी जेल में बंद है। चंद्रकांत पाटील दिल्ली केस में जेल में पांच साल रहने के बाद बाहर आया और फिर उसने साल 2003 में नालासोपारा में बिल्डर राजेंद्र पतंगे का मर्डर कर दिया।

इसके बाद वह कुछ दिनों तक पुणे में रहा। वहां से फिर वह बेलगांव चला गया और अपने पुलिस वाले दोस्त के फार्म हाउस में रहने लगा। उसने वहां अपनी पूरी शिनाख्त बदल ली। वह चंद्रकांत पाटील से चरण पालेकर बन गया। इसी नाम के उसने फर्जी दस्तावेज बनवा लिए। सिर्फ परिवार वालों को छोड़कर हर कोई उसे उसके नए नाम से जानता था, पुराने नाम से नहीं। परिवार से इस जुड़ाव की वजह से ही वह बार-बार मुंबई आता था। उसी में वह जांच एजेंसियों की नजर में आ गया और अंतत: सलाखों के पीछे पहुंच गया।

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