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इंद्राणी मुखर्जी ने रखी हैं सेटलमेंट की कुछ शर्तें

मुंबई : हाई प्रोफाइल शीना बोरा हत्याकांड में जेल की सजा काट रहे पति-पत्नी पीटर मुखर्जी और इंद्राणी (46) ने आखिरकार तलाक की याचिका दाखिल कर ही दी। मंगलवार को दोनों ने मुंबई के बीकेसी स्थित पारिवारिक न्यायालय में याचिका जमा की। ये दोनों ही कभी एक टीवी चैनल के मालिक थे और हाई सोसायटी में उनका उठना-बैठना था।
गौरतलब है कि इंद्राणी मुखर्जी की बेटी शीना बोरा की हत्या में इंद्राणी-पीटर मुखर्जी और इंद्राणी के पूर्व पति संजीव खन्ना जेल में हैं। इंद्राणी और पीटर आपसी सहमति से तलाक लेने और सेटलमेंट के लिए राजी हो गए हैं। हिंदू मैरिज ऐक्ट के अनुसार, यदि तलाक आपसी सहमति से होता है तो वह 6 महीनों में ही कोर्ट इसकी इजाजत दे सकती है।
इंद्राणी भायखला की महिला जेल से और पीटर आर्थर रोड जेल से कोर्ट पहुंचे। साथ में भारी पुलिस बंदोबस्त था। वे करीब 11 बजे से 2 बजे तक कोर्ट में रहे। मुख्य जज श्रीमती एसएस सावंत को तलाक के पेपर सौंपे गए। इन दोनों के संबंधों में उस समय नाटकीय मोड़ आया, जब 2016 में पीटर ने कोर्ट को बताया कि वह इंद्राणी से तलाक लेना चाहता है। एक साल बाद ही इंद्राणी ने कोर्ट से कहा कि वह भी तलाक चाहती है। इस साल अप्रैल में इंद्राणी ने पीटर को तलाक के लिए कानूनी नोटिस भेजकर उन आधारों को बताया जिससे उनका संबंध विच्छेद नजर आ रहा था। कोर्ट के समक्ष
पेश किया जाए
इस पर विशेष सीबीआई कोर्ट ने 14 सितंबर को दोनों के जेल अधिकारियों को निर्देश दिया था कि दोनों को ही 18 सितंबर को पारिवारिक कोर्ट के समक्ष पेश किया जाए। इंद्राणी भायखला की महिला जेल में 2015 से ही बंद है। मुख्य जज एसएस सावंत ने दोनों को जब परामर्शदाता से मिलने को कहा तो दोनों ने कहा कि वे तलाक लेने के अपने निर्णय पर अटल हैं। इसके बाद जज ने इस मामले की अंतिम सुनवाई की तिथि 25 मार्च, 2019 तय कर दी। हिन्दु विवाह कानून में तलाक के मामले में दूसरी तिथि अनिवार्य रुप से 6 महीनों बाद (कूलिंग ऑफ पीरियड) दी जाती है।
कब हुई शादी
पीटर और इंद्राणी के बीच विवाह अब से 16 साल पहले 2002 में हुआ था। मामला क्या है: शीना बोरा इंद्राणी की बेटी थी जिसे कथित रूप से उसकी मां इंद्राणी ने मार दिया था। इस षडयंत्र में उसका पूर्व पति संजीव खन्ना और ड्राइवर श्यामवर रॉय एवं पति पीटर शामिल रहे थे। हत्या के बाद शीना का शव रायगढ़ की खाइयों में दबा दिया गया। यह हत्या उस समय सामने आई, जब रॉय को अगस्त, 2015 में किसी अन्य मामले में गिरफ्तार किया गया था और पुलिस ‘पूछताछ’ में उसने राज उगल दिया। बाद में वह सरकारी गवाह बन गया।

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