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दिल्ली में कांग्रेस का अभियान, ओडिशा में पार्टी परेशान

भुवनेश्वर
कांग्रेस पार्टी भले ही देश के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग लाने के लिए पूरा जोर लगा रही है, लेकिन ओडिशा में उसकी ही यूनिट इस कदम से बेहद परेशान है। सूबे में अगले साल चुनाव होने हैं और दीपक मिश्रा के उड़िया मूल का होने की वजह से महाभियोग एक मुद्दा बन सकता है, जो कांग्रेस पर भारी पड़ सकता है। कांग्रेस ने एक दिन पहले ही सूबे में नेतृत्व को लेकर चल रही अनिश्चितता को खत्म करने की कोशिश करते हुए नए पदाधिकारियों का ऐलान किया है। इस बीच पार्टी का यह कदम उसे ‘ओडिशा के बेटे’ के खिलाफ दिखा सकता है। बीजेडी और बीजेपी ने महाभियोग का विरोध करते हुए जस्टिस मिश्रा के प्रति समर्थन जताया है। कांग्रेस के कई राज्य स्तरीय नेताओं ने बताया कि उसका यह कदम सूबे में पार्टी को अलग-थलग करने की स्थिति में ले आया है क्योंकि ओडिशा के लोग जस्टिस मिश्रा के चीफ जस्टिस बनने को प्रेरक मानते हैं। कांग्रेस के एक लीडर ने हमारे सहयोगी अखबार से बताया, ‘कोई भी उड़िया यह नहीं देखना चाहेगा कि ओडिशा का कोई राजनीतिक दल यहां के किसी मूल निवासी के खिलाफ जाए।’ हालांकि कांग्रेस के सीनियर लीडर और पूर्व कानून मंत्री नरसिंह मिश्रा ने कहा, ‘इस कदम को राजनीतिक तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। यदि चीफ जस्टिस के खिलाफ डॉक्युमेंट्स हैं तो उसका कोई सिर्फ इस आधार पर विरोध नहीं कर सकता कि वे ओडिशा के हैं।’ इस बीच सूबे में कांग्रेस को पछाड़कर बीजेडी (बीजू जनता दल) के मुकाबले मुख्य विपक्ष दल बनी बीजेपी ने महाभियोग के प्रस्ताव को ‘ऐंटी-ओडिशा’ करार दिया है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उड़िया में लिखे कई ट्वीट्स में कहा, ‘हमेशा से ओडिशा विरोधी रहने वाली कांग्रेस अब राज्य के सफल व्यक्ति जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव ले आई है। केंद्र में अपनी सत्ता के दौरान कांग्रेस ने कभी ओडिशा के साथ न्याय नहीं किया। यह कदम कांग्रेस की ओडिशा विरोधी सोच को दर्शाता है।’

बीजेडी बोली, कांग्रेस को इतना नीचे नहीं गिरना चाहिए
चीफ जस्टिस के उड़िया मूल के होने की वजह से ही सूबे की सत्ताधारी पार्टी बीजेडी ने कांग्रेस के प्रस्ताव से किनारा करते हुए उसे राजनीतिक करार दिया है। लोकसभा में बीजेडी के संसदीय दल के नेता भर्तृहरि महताब ने कहा, ‘कांग्रेस को इतने निचले स्तर तक जाकर न्यायपालिका को चुनौती नहीं देनी चाहिए। कई राजनीतिक उद्देश्यों के चलते यह कदम उसने उठाया है। सीजेआई के खिलाफ लगाए गए आरोप काफी समय पहले ही निपट चुके हैं। इनमें कोई भी सच्चाई नहीं है।’ सूबे के माहौल को इससे भी समझा जा सकता है कि वकीलों ने जस्टिस मिश्रा के प्रति अपना समर्थन जताते हुए कांग्रेस के कदम की आलोचना की है।

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