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छगन भुजबल की गिरफ्तारी और जमानत की कहानी

मुंबई
महाराष्ट्र सदन घोटाला और आय से अधिक संपत्ति के मामले में पूर्व सार्वजनिक निर्माण कार्य मंत्री और राकांपा नेता छगन भुजबल को आखिर 2 साल बाद जमानत मिल गई। 14 मार्च 2016 को भुजबल को गिरफ्तार किया गया था और 4 मई 2018 को उन्हें जमानत मिली। इससे भुजबल समर्थकों में उत्साह का वातावरण है। 14 मार्च 2016 दिन सोमवार

– सुबह 11:30 बजे के लगभग प्रवर्तन निदेशालय के बुलावे पर पूछताछ के लिए छगन भुजबल प्रवर्तन निदेशालय के दफ्तर पहुंचे।

-अंदर भुजबल से पूछताछ चल रही थी, बाहर उनके समर्थकों की भीड़ जमा थी।

– 11 घंटे की पूछताछ के बाद रात को 10:00 बजे भुजबल को गिरफ्तार कर लिया गया।

भुजबल समर्थकों का हंगामा बढ़ गया, इसलिए बलार्ड पियर स्थित प्रवर्तन निदेशालय के दफ्तर के आसपास धारा 144 लगानी पड़ी।

15 मार्च 2016
दोपहर को छगन भुजबल को सत्र न्यायालय में पेश किया गया। सत्र न्यायालय ने भुजबल को 2 दिन की प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में भेज दिया। भुजबल की जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया।

17 मार्च 2016
सत्र न्यायालय ने भुजबल को 31 मार्च तक न्यायालयीन हिरासत में रखने का आदेश दिया। इसके बाद भुजबल को आर्थर रोड जेल भेज दिया गया।

*4 मई 2018* छगन भुजबल को पांच लाख रुपये की जमानत पर रिहा किया गया। साथ ही यह शर्त भी लगाई गई है कि जब भी जांच एजेंसी उन्हें बुलाएगी, उन्हें हाजिर होना पड़ेगा।

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