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ढाई साल तक शैलजा ने पति से छुपाए रखी हांडा से ‘दोस्ती’ की बात!

एक मेजर ने दूसरे मेजर की पत्नी का दिल्ली की सड़क पर सरेआम कत्ल कर दिया ये खबर तो आप सबको पता है. पर वो वजह क्या थी जिसकी वजह से मेजर निखिल ने शैलजा का कत्ल किया? क्या ये कत्ल अचानक गुस्से के आलम में हो गया या फिर मेजर कत्ल करने के इरादे से ही घर से निकला था? तो आइए इन सारे सवालों के साथ-साथ आपको इस सवाल का भी जवाब देते हैं कि आखिर मेजर निखिल ने शैलजा का कत्ल क्यों किया.

मेजर निखिल ने शैलजा का क़त्ल क्यों किया? क्या शैलजा निखिल से पीछा छुड़ाना चाहती थी इसलिए? या निखिल शैलजा से पीछा छुड़ाना चाहता था इसलिए? 23 जून की दोपहर को निखिल और शैलजा में झगड़ा क्यों हुआ? क्या निखिल ने क़त्ल की प्लानिंग पहले से कर रखी थी? शैलजा से मिलने निखिल दो चाकू लेकर क्यों आया था? क्या 23 जून को दोनों की मुलाक़ात पहले से तय थी? आख़िर निखिल और शैलजा के रिश्ते का सच क्या है? कहते हैं कि किसी भी क़त्ल के पीछे कोई ना कोई मकसद ज़रूर होता है. एक बार मकसद ज़ाहिर हो जाए तो फिर केस आसानी से सुलझ जाता है. इस केस में कातिल और मकतूल दोनों सामने हैं. पर दिक्कत ये है कि शैलजा के कत्ल को लेकर मकसद एक नहीं बल्कि दो-दो बताए जा रहे हैं. यही वजह है कि केस आईने की तरह साफ होते हुए भी पुलिस शैलजा के कत्ल के मकसद को लेकर दावे से अभी कुछ नहीं कह रही है.

शैलजा के कत्ल के मकसद को समझने के लिए केस से जुड़ी कुछ चीजें समझना जरूरी है. पुलिस से पूछताछ के दौरान मेजर निखिल बार-बार यही कह रहा है कि शैलजा से उसकी दोस्ती तीन साल पहले 2015 में फेसबुक के जरिए हुई थी. तब शैलजा ने बताया था कि उसका पति बैंक मे काम करता है. इसके बाद दीमापुर में पोस्टिंग के दौरान वहीं शैलजा से उसकी मुलाकात हुई और फिर दोस्ती.

जबकि शैलजा के पति मेजर अमित का कहना है कि वो मेजर निखिल को सिर्फ छह महीने से जानते हैं. यानी शैलजा ने ढाई साल तक अमित से निखिल का सच छुपाए रखा? शैलजा ने निखिल से दोस्ती की बात अमित को नहीं बताई. मगर क्यों?

मेजर अमित और शैलजा के घर वाले लगातार कह रहे हैं कि निखिल शैलजा का पीछा किया करता था और उसे तंग करता था. इसके अलावा दोनों के बीच कोई रिश्ता नहीं था. जबकि पुलिस की पूछताछ में मेजर निखिल लगातार यही कह रहा है कि शैलजा के पीछे वो नहीं बल्कि शैलजा उसके पीछे पड़ी थी. वो उससे शादी करना चाहती थी.

हालांकि पुलिस का कहना है कि ये निखिल का ड्रामा भी हो सकता है. क्योंकि शैलजा अब इस दुनिया में नहीं है, लिहाज़ा निखिल के दावे की तसदीक हो नहीं सकती. साथ ही शैलजा पर सारा इलज़ाम डाल कर ये निखिल की खुद को बचाने की कोशिश भी हो सकती है.

लेकिन पुलिस सूत्रों के मुताबिक इतना साफ है कि मेजर निखिल और शैलजा फोन और व्हाट्सएप पर एक दूसरे के संपर्क में रहा करते थे. बकौल पुलिस सिर्फ पिछले सात महीने में ही शैलजा और निखिल ने एक-दूसरे को करीब 3300 कॉल और 1500 मैसेज किए थे.

तो फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि निखिल ने शैलजा की जान ले ली. पुलिस सूत्रों की मानें तो कहानी में ट्विस्ट पिछले साल दिसंबर में आया. जब मेजर अमित का तबादला दिल्ली हो गया और वो शैलजा के साथ दीमापुर से दिल्ली आ गए. दिल्ली आने के बाद शैलजा अमृतसर चली गई थी. शैलजा का परिवार अमृतसर में ही रहता है. इस बीच चार जून को बीमारी का बहाना बनाकर मेजर निखिल भी दीमापुर से दिल्ली आ गया. निखिल के बीवी बच्चे दिल्ली के साकेत इलाके में ही रहते हैं.

दिल्ली आने के बाद जून में दो बार निखिल अमृतसर शैलजा से मिलने गया. पूछताछ में निखिल ने पुलिस को बताया कि दूसरी बार अमृतसर के एक मॉल में मुलाकात के दौरान शैलजा से शादी को लेकर उसका फिर से झगड़ा हुआ था और तभी पहली बार शैलजा के कत्ल की बात उसके दिमाग में आई थी.

23 जून की सुबह भी निखिल और शैलजा के बीच व्हाट्सएप पर बात हुई और दोनों ने आर्मी के बेस हास्पिटल में मिलने का फैसला किया. हास्पिटल से दोनों साथ में निखिल की कार में निकले और फिर करीब 45 मिनट तक दोनों कार में रहे. इस दौरान दोनों में लगातार झगड़ा हो रहा था.

पुलिस सूत्रों की मानें तो निखिल पहले से ठान कर आया था कि अगर शैलजा अपनी बात पर अड़ी रही तो वो उसे मार देगा. और उसने ठीक यही किया भी. निखिल ने साथ लाए चाकू से शैलजा के गले पर पहले वार किया और फिर शैलजा को कार से बाहर फेंककर अपनी कार से उसे रौंदते हुए वहां से निकल भागा. इस तरह से ये मोहब्बत की कहानी कत्ल पर जाकर खत्म हो गई.

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