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बॉम्बे हाई कोर्ट : विमान सुरक्षा बुनियादी ढांचे का बंदोबस्त करें

मुंबई
बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को मुंबई के घाटकोपर इलाके में हुए विमान हादसे का हवाला देते हुए वायु सुरक्षा के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचे की व्यवस्था करने की आवश्यकता पर शुक्रवार को बल दिया। इस विमान हादसे में पांच व्यक्तियों की मौत हो गई थी। अदालत ने कहा कि संबंधित अधिकारियों और सरकारी एजेंसियों को अब कदम उठाते हुए वायु सुरक्षा के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे की व्यवस्था करनी चाहिए या फिर लोगों की जान जोखिम में डालते रहें जैसा कि वह अब तक करते रहे हैं। न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति भारती डांगरे की पीठ ने मुंबई मेट्रोपोलिटन क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) की एक अर्जी पर यह टिप्पणी की। एमएमआरडीए ने यहां कोलाबा-सीप्ज मेट्रो रेल जंक्शन के लिए ऊपर से गुजरने वाला केबल लगाने की अनुमति मांगते हुए यह अर्जी लगाई है।
मेट्रो लाईन के लिए ऐसे केबल बिछाने से ये जुहू हवाई अड्डे के फनल एरिया में 11 सेंटीमीटर अंदर तक चले जाऐंगे। उपनगरीय क्षेत्र घाटकोपर इलाके में कल 12 यात्रियों की क्षमता वाला जो विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, उसने जुहू से ही परीक्षण उड़ान भरी थी। एमएमआरडीए के वकील एस बी तालेकर ने अदालत से कहा कि ऊंचाई के नियमों का न्यूनतम उल्लंघन है, भारतीय विमानपत्तनम प्राधिकरण (एएआई) ने जनवरी में उसे (एमएमआरडीए को) अनापत्ति प्रमाणपत्र दे दिया था लेकिन उसने हाई कोर्ट से भी इसकी इजाजत लेने का निर्देश दिया था। पीठ ने कहा कि कभी कभी ‘एक सेंटीमीटर’ उल्लंघन भी बहुत ज्यादा होता है। अदालत ने इस विषय पर विमान पत्तन प्राधिकरण, नागर विमानन निदेशालय, केंद्रीय नागर विमानन मंत्रालय से एमएमआरडीए की अर्जी पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। हालांकि अदालत ने इस मामले में किसी प्रकार की राहत संबंधी कोई आदेश देने से इनकार कर दिया।

न्यायाधीश ओक ने कहा कि ‘संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को प्रदूषण मुक्त पर्यावरण पाने का संवैधानिक अधिकार है। ‘आप इस अधिकार को प्रदत्त करने के लिए नागरिकों को क्या अधिकार दे रहे हैं’। अब इस मुद्दे पर 2 जुलाई को सुनवाई होगी।

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