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प्लास्टिक के बैग ही नहीं, रोजमर्रा की ये चीजें भी बनती जा रहीं है आपकी दुश्मन

नई दिल्ली, प्रदूषण से निजात पाने के लिए पूरी दुनिया में प्लास्टिक बैग पर बैन लगाने को लेकर तो खूब मुहिम चल रही हैं, लेकिन हमने इस ओर ध्यान नहीं दिया कि हमारे रोजमर्रा की जरूरत वाले सामान भी हमारे लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। उदाहरण के तौर पर लंच बॉक्स हो, पानी की बोतल हो, बैग, चश्मा गिलास, खाने-पीने के कप प्लेट या अन्य। हम बेफिक्र होकर धड़ल्ले से रोजाना इनका इस्तेमाल करते हैं लेकिन धीमी रफ्तार से इनसे आने वाले खतरों को हम पहचान नहीं पाते हैं। दरअसल प्लास्टिक हमारे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। आपको शायद अंदाजा भी नहीं हो, लेकिन इसका हमारे स्वास्थ्य पर घातक असर पड़ रहा है। काफी सामान अलग तरह की प्लास्टिक से बने होते हैं, जिनके बारे में कम ही लोगों को पता होगा। आज हम आपको बताते हैं कितने प्रकार के प्लास्टिक होते हैं और उनका क्या असर होता है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनियाभर में 7 तरह के प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है। इनको अलग-अलग कोड से जाना जाता है, जिनसे उनकी पहचान की जाती है। जानते हैं इन सातों कोड वाले प्लास्टिक के बारे में कि ये एक-दूसरे से किस प्रकार अलग होते हैं। यूं तो सभी प्लास्टिक स्वास्थ्य के लिए जहरीले होते हैं लेकिन मजबूरी हो तो नीचे दी जा रही जानकारी के माध्यम से आप जान पायेंगे कि कौन सा प्लास्टिक कम जहरीला है। कोड 1 प्लास्टिक- कोड 1 प्लास्टिक में पॉलीएथिलीन टेराफ्थलेट मौजूद होता है। पॉलिएस्टर का कपड़ा, पानी, जूस और जैम इत्यादि के बोतल इसी प्लास्टिक की मदद से बनाये जाते हैं। ये सेहत के लिए काफी खतरनाक होते हैं। इसमें मौजूद एंटीमोनी ट्राइऑक्साइड से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने का खतरा रहता है। इसके अलावा इससे स्किन संबंधी समस्या, पीरियड्स और प्रेग्नेंसी में भी मुश्किलें आती हैं।
कोड 2 प्लास्टिक- कोड 2 प्लास्टिक में हाई डेंसिटी पॉलिथीन पाई जाती है। दूध, जूस, शैंपू, डिटर्जेंट और कुछ दवाइयों की बोतल कोड 2 प्लास्टिक की बनी होती हैं। हालांकि इस प्लास्टिक का कम प्रयोग करने से ज्यादा नुकसान नहीं होता है।

कोड 3 प्लास्टिक- इस प्लास्टिक में पॉलीविनाइल क्लोराइड मौजूद होता है। पॉलीविनाइल क्लोराइड बच्चों के खिलौने, माउथवॉश की बोतल, कार्पेट के निचले हिस्से, खिड़कियों के फ्रेम, शैंपू की बोतल आदि चीजों में इस्तेमाल किया जाता है। अगर आप इन प्लास्टिक से बने सामानों का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो सावधान हो जाएं, क्योंकि ये प्लास्टिक सबसे ज्यादा खतरनाक होता है।
इनसे अस्थमा होता है, बच्चों को एलर्जी होती है, साथ ही ये पर्यावरण पर भी बुरा असर डालता है। इससे कैंसर होने की आशंका भी सबसे ज्यादा रहती है, जिसमें मुख्य रूप से ब्रेस्ट कैंसर होता है।
कोड 4 प्लास्टिक- इस कोड के प्लास्टिक में लो डेंसिटी पॉलिथीन (LDPE) पाया जाता है। पॉली बैग, ब्रैड, फ्रोजन फूड, गार्बेज, तार का केबल, खाना रखने के डब्बे आदि कोड 4 वाली प्लास्टिक से बनाए जाते हैं। ये प्लास्टिक दूसरे प्लास्टिक के मुकाबले कम नुकसान पहुंचाता है।

कोड 5 प्लास्टिक- इसमें पोलीप्रोपलीन (PP) मौजूद होते हैं। ये प्लास्टिक बच्चों के डायपर, सैनिट्री नैप्किन, बच्चों की बोतल, स्ट्रॉ, चीज, दही, कैचअप की बोतल के ढक्कन इसी प्लास्टिक से बनाए जाते हैं। ये प्लास्टिक वैसे तो ज्यादा खतरनाक नहीं होता है लेकिन इससे अस्थमा होने का थोड़ा खतरा रहता है।

कोड 6 प्लास्टिक- इस प्लास्टिक में पॉलीस्टीरीन (PS) पाया जाता है। इस प्लास्टिक का सबसे ज्यादा असर नर्वस सिस्टम और दिमाग पर पड़ता है। जानवरों पर हुई कई स्टडी में सामने आ चुका है कि कोड 6 वाले प्लास्टिक से फेफड़े, लिवर और इम्यून सिस्टम को नुकसान पहुंचता है।
कोड 7 प्लास्टिक- कोड 7 प्लास्टिक में पॉलीकार्बोनेट (PC) मौजूद होता है। पानी की बोतल, पानी के बड़े कंटेनर, बच्चों की बोतल, कप, बैंकिंग बैग, कैचअप और जूस के कंटेनर, चश्मे के लेंस, सीडी, डीवीडी आदि चीजों में कोड 7 प्लास्टिक शामिल होता है। इस प्लास्टिक के इस्तेमाल से शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन पर असर पड़ता है। इसके प्रभाव से पुरुषों के स्पर्म प्रोडक्शन में कमी आ सकती है। इसके अलावा इम्युनिटी पावर कमजोर होती है। डायबिटीज, इन्फर्टीलिटी, मोटापा, ब्रेस्ट कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, दिल से संबंधित बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है।

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