रहिवासियों ने जबरन तोड़फोड़ और तीन मंदिरों की मूर्तियां, ऐतिहासिक बावड़ी गायब होने का लगाया आरोप
हैदर असलम शेख ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई का दिया भरोसा
हैदर शेख बोले अगर नियमों का उल्लंघन मिला तो DGS Realty होगी ब्लैकलिस्टेड ?
मुंबई । मलाड पूर्व के वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे से सटे दिंडोशी पाड़ा स्थित मकबूल कंपाउंड और दिंडोशी पंचरत्न सहकारी गृहनिर्माण संस्था का विवाद एक बार फिर चर्चा में है। पिछले कुछ समय से मुंबई और मुंबई से सटे नालासोपारा में डीजीएस रियल्टी को लेकर अलग-अलग विवाद सामने आने के दावों के बीच अब मकबूल कंपाउंड में मंदिरों और करीब 60 से 70 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक बावड़ी को लेकर रहिवासियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि डीजीएस रियल्टी के मालिक ईश्वर शुक्ला की ओर से परिसर में कथित तौर पर जबरन तोड़फोड़ और मनमानी की जा रही है। मामला सिर्फ इमारतों और जमीन तक सीमित नहीं बताया जा रहा, बल्कि स्थानीय लोगों के अनुसार यहां धार्मिक आस्था से जुड़े मंदिर और इलाके की पुरानी बावड़ी भी विवाद के केंद्र में आ गई है। यही वजह है कि इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी ध्यान खींचना शुरू कर दिया है।
मकबूल कंपाउंड और दिंडोशी पंचरत्न सहकारी गृहनिर्माण संस्था के रहिवासियों तथा पदाधिकारियों ने अपनी शिकायत लेकर कांग्रेस के उत्तर पश्चिम जिला उपाध्यक्ष देवव्रत चौधरी उर्फ बंगाली भाई से मुलाकात की। रहिवासियों की शिकायत पर देवव्रत चौधरी के नेतृत्व में पी-उत्तर विभाग के प्रभाग समिति अध्यक्ष हैदर असलम शेख को लिखित शिकायत दी गई। शिकायत में डीजीएस रियल्टी के मालिक ईश्वर शुक्ला के खिलाफ कथित जबरन तोड़फोड़ और मनमानी का आरोप लगाया गया। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए हैदर असलम शेख ने 5 अक्टूबर को स्वयं मकबूल कंपाउंड का दौरा किया और स्थानीय लोगों से पूरे मामले की जानकारी ली।
स्थानीय रहिवासियों ने हैदर असलम शेख के सामने आरोप लगाया कि परिसर में पहले ही तीन मंदिरों को तोड़ा जा चुका है और वहां स्थापित मूर्तियां भी अब दिखाई नहीं दे रही हैं। लोगों का दावा है कि तीन मंदिरों के बाद अब चौथे शिव शंकर मंदिर को भी तोड़ने की तैयारी की जा रही है। इस आरोप ने इलाके में धार्मिक आस्था और निर्माण गतिविधियों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास या निर्माण के नाम पर अगर धार्मिक स्थलों को हटाया जाता है, तो कम से कम संबंधित लोगों की धार्मिक भावनाओं और नियम-कानून का ध्यान रखा जाना चाहिए। हालांकि मंदिरों को तोड़े जाने और मूर्तियों के गायब होने से जुड़े इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
मकबूल कंपाउंड का विवाद केवल मंदिरों तक ही सीमित नहीं है। मिश्रा चाल में मौजूद करीब 60 से 70 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक बावड़ी को लेकर भी स्थानीय लोगों ने गंभीर चिंता जताई है। स्थानीय समाजसेवक यम सिद्दिकी और विशाल तिवारी ने आरोप लगाया कि इस पुरानी बावड़ी को भी मिटाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि एक समय यह बावड़ी पठानवाड़ी इलाके के लोगों के लिए पानी का महत्वपूर्ण स्रोत हुआ करती थी और कोरोना संकट के दौरान भी स्थानीय लोगों को इसी बावड़ी से पानी मिला था। स्थानीय लोगों के मुताबिक वर्ष 2008-09 के दौरान तत्कालीन नगरसेवक ज्ञानमूर्ति शर्मा के कार्यकाल में इस बावड़ी का जीर्णोद्धार कराया गया था और आज भी वहां उनके नाम का पत्थर मौजूद है। आरोप है कि अब निर्माण सामग्री और मलबा डालकर इस ऐतिहासिक बावड़ी को भरने का प्रयास किया जा रहा है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल निर्माण विवाद का नहीं बल्कि इलाके की पुरानी सार्वजनिक विरासत और स्थानीय सुविधा से जुड़े एक महत्वपूर्ण स्थान का भी बन जाता है।
इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में दिंडोशी पंचरत्न सोसायटी का पिछला विवाद भी बताना महत्वपूर्ण है। पिछले महीने पंचरत्न सोसायटी में तोड़फोड़ शुरू होने को लेकर भी स्थानीय रहिवासियों में नाराजगी सामने आई थी। उस समय महिलाओं और पुरुषों समेत सोसायटी के कई लोगों ने गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस स्टेशन का घेराव किया था। रहिवासियों की ओर से डीजीएस रियल्टी और भाजपा नेता ज्ञानमूर्ति शर्मा, स्थानीया नगरसेविका संगीता ज्ञानमूर्ति शर्मा के ख़िलाफ़ जमकर नारे लगाये गए थे यहाँ तक की कई महिलाओं ने रोते बिलखते हुए गालिया तक दी थी। उस विवाद के बाद अब मकबूल कंपाउंड में मंदिरों और बावड़ी को लेकर सामने आई शिकायत ने पूरे मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
मामले को लेकर कांग्रेस नेता देवव्रत चौधरी उर्फ बंगाली भाई ने भाजपा के उत्तर पश्चिम जिला अध्यक्ष ज्ञानमूर्ति शर्मा, स्थानीय नगरसेविका एवं मुंबई उपनगर की स्थापत्य समिति की अध्यक्ष संगीता शर्मा तथा कुछ अन्य भाजपा पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए। चौधरी ने डीजीएस रियल्टी और कुछ भाजपा पदाधिकारियों के बीच कथित संबंधों को लेकर भी सवाल खड़े किए और पूछा कि यदि स्थानीय जनता अपनी समस्याएं लेकर सामने आ रही है, तो उनकी सुनवाई कौन करेगा। उन्होंने स्थानीय आमदार सुनील प्रभु को लेकर भी जनता की समस्याओं पर सवाल उठाए।
मकबूल कंपाउंड के इस विवाद में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर निर्माण गतिविधियों के बीच मंदिरों और ऐतिहासिक बावड़ी से जुड़े स्थानीय लोगों के आरोपों पर प्रशासन क्या कदम उठाता है। विकास का काम अपनी जगह है, लेकिन अगर रहिवासियों के आरोपों के मुताबिक धार्मिक स्थल या पुरानी सार्वजनिक बावड़ी प्रभावित हो रही है, तो इसकी जांच और स्थिति स्पष्ट करना संबंधित प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है। खासकर तब, जब स्थानीय लोग पहले ही पुलिस और नेताओं के सामने अपनी नाराजगी दर्ज करा चुके हैं।
वहीं मौके के दौरे के बाद पत्रकारों से बातचीत में पी-उत्तर विभाग के प्रभाग समिति अध्यक्ष हैदर असलम शेख ने स्पष्ट किया कि मंदिर और बावड़ी से जुड़ी शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोगों की धार्मिक आस्था का सम्मान होना चाहिए और बिल्डर से बात कर मंदिर का उचित समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। शेख ने यह भी स्पष्ट कहा कि बावड़ी को भरने या उसे नष्ट करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि ऐसा कोई प्रयास किया गया तो संबंधित बीएमसी और अन्य विभागों में शिकायत कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की जाएगी।
हैदर असलम शेख ने आगे कहा कि यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो डीजीएस रियल्टी के खिलाफ संबंधित विभागों से आवश्यक कार्रवाई की मांग की जाएगी और जरूरत पड़ने पर कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की मांग भी की जाएगी। उनके इस बयान के बाद अब स्थानीय रहिवासियों की निगाह प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। सवाल यह भी है कि जिन मंदिरों को पहले ही तोड़े जाने और मूर्तियां गायब होने का आरोप लगाया जा रहा है, उनकी स्थिति क्या है, चौथे शिव शंकर मंदिर को लेकर वास्तव में क्या योजना है और करीब 60 से 70 वर्ष पुरानी बावड़ी को लेकर प्रशासनिक रिकॉर्ड में क्या स्थिति दर्ज है।
मकबूल कंपाउंड का यह विवाद अब केवल एक निर्माण परियोजना का विवाद नहीं रह गया है। एक तरफ रहिवासी जबरन तोड़फोड़, मंदिरों और मूर्तियों को लेकर आरोप लगा रहे हैं, दूसरी तरफ ऐतिहासिक बावड़ी को बचाने की मांग सामने आई है और राजनीतिक नेता भी एक-दूसरे पर सवाल उठा रहे हैं।फिलहाल इस पूरे मामले में स्थानीय लोगों की नजर बीएमसी, प्रशासन और संबंधित विभागों की आगे की कार्रवाई पर है।
मेट्रो दिनांक टीवी न्यूज ने इस मामले में डीजीएस रियल्टी के मालिक ईश्वर शुक्ला, भाजपा उत्तर पश्चिम जिला अध्यक्ष ज्ञानमूर्ति शर्मा और उनकी पत्नी तथा स्थानीय नगरसेविका संगीता शर्मा से भी प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे भी संपर्क नहीं हो पाया। संबंधित पक्ष यदि अपनी प्रतिक्रिया देना चाहते हैं, तो उनकी प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे समाचार में उचित स्थान दिया जाएगा।
