2014 के कथित रिश्वत मामले ने फिर पकड़ा तूल, प्रदीप पांडेय ने धमकी, हमले और सुरक्षा में लापरवाही के लगाए आरोप
अदालत के सुरक्षा आदेश के बावजूद पुलिस सुरक्षा हटाए जाने का किया दावा
मेट्रो दिनांक संवाददाता
मुंबई । मलाड पूर्व में पूर्व नगरसेवक ज्ञानमूर्ति शर्मा के साल 2014 के कथित रिश्वत मामले को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। इस मामले के शिकायतकर्ता प्रदीप पांडेय ने एक इंटरव्यू में भाजपा के उत्तर-पश्चिम जिला अध्यक्ष और पूर्व नगरसेवक ज्ञानमूर्ति शर्मा पर गंभीर आरोप लगाते हुए अपनी सुरक्षा और मामले की जांच को लेकर सवाल उठाए हैं। पांडेय का दावा है कि भ्रष्टाचार के इस मामले में शिकायत करने के बाद से उन्हें धमकियों, दबाव और हमले के डर का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत की ओर से सुरक्षा देने का आदेश होने के बावजूद उनकी पुलिस सुरक्षा हटा दी गई, जिससे उनकी जान को खतरा बढ़ गया।
पहले बता दे कि ज्ञानमूर्ति शर्मा सन २००७ से २०१७ तक मलाड पूर्व के धनजीवाडी अंतर्गत आने वाले वार्ड क्र: ४४ से नगरसेवम थे और वर्तमान में भाजपा के उत्तर-पश्चिम जिला अध्यक्ष हैं, जबकि उनकी पत्नी संगीता ज्ञानमूर्ति शर्मा उसी वार्ड की भाजपा की टिकट पर वर्तमान की नगरसेविका हैं। प्रदीप पांडेय के अनुसार, साल 2014 में उन्होंने तत्कालीन नगरसेवक ज्ञानमूर्ति शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक विभाग यानी ACB में शिकायत की थी। शिकायत के मुताबिक, तीन व्यावसायिक ट्रांसपोर्ट वाहनों के खिलाफ कार्रवाई से बचाने के लिए कथित तौर पर पहले दो लाख रुपये की मांग की गई और बाद में एक लाख रुपये पर सहमति बनी। मामले से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, 9 सितंबर 2014 को ACB ने चिह्नित नोटों के साथ रेड की तैयारी की। हालांकि शर्मा उस समय कार्यालय में मौजूद नहीं थे और कथित तौर पर उनके ड्राइवर ने शिकायतकर्ता से रकम निजी सचिव तिवारी को देने के लिए कहा। इसके बाद रकम पान विक्रेता दिनेश मिठाईलाल यादव तक पहुंचने और पान की दुकान की दराज से बरामद हुई। ACB के रिकॉर्ड में नोटों के सीरियल नंबरों का मिलान, एंथ्रासीन पाउडर और अल्ट्रावायलेट लाइट से जांच तथा आवाज की रिकॉर्डिंग का भी उल्लेख है। इस मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों के तहत कानूनी कार्रवाई की गई थी।
बता दे की प्रदीप पांडेय ने दावा किया है कि कथित रिश्वत की रकम दो लाख रुपये से घटाकर एक लाख रुपये तय किए जाने की बातचीत, पैसे किसे और कब देने हैं, इस संबंध में हुई चर्चा तथा ज्ञानमूर्ति शर्मा और अन्य संबंधित लोगों के बीच हुई कथित बातचीत की ऑडियो और कॉल रिकॉर्डिंग समेत अन्य सबूत उनके पास मौजूद है, और जिसे कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में भी उल्लेखित किया गया है।
पांडेय ने इंटरव्यू में आरोप लगाया कि इस मामले में शिकायत करने के बाद उनकी जिंदगी मुश्किल हो गई। उनका दावा है कि उनकी गाड़ी को मलाड पूर्व के टाइम्स ऑफ इंडिया के पास हाईवे क्षेत्र में आग लगा दी गई और उन्हें धमकाकर अदालत में बयान बदलने का दबाव बनाया गया। पांडेय के मुताबिक, कुछ लोग और राजनीतिक हस्तियां उनके घर तक आए और उनसे कहा गया कि अदालत में वही बयान दें जो उन्हें बताया जाए तथा ज्ञानमूर्ति शर्मा को पहचानने से इनकार कर दें। उन्होंने कहा कि उनके पास इस संबंध में स्वयं ज्ञानमूर्ति शर्मा द्वारा भेजे गए व्हाट्सऐप संदेश और अन्य सबूत मौजूद हैं।
प्रदीप पांडेय ने कहा कि उनका किसी राजनीतिक साजिश से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने ट्रांसपोर्ट के काम के दौरान चेकिंग नाकों पर कथित वसूली और भ्रष्टाचार के कारण परेशानियां होने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि जब उनकी पुलिस सुरक्षा हटाई जाती है, तब उन्हें हमले का डर सताने लगता है। पांडेय ने दावा किया कि 3 जुलाई 2023 को उन पर हमला हुआ और मुंबई से उत्तर प्रदेश जाते समय उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई तथा चाकू से चोट पहुंचाई गई। उन्होंने कहा कि इस संबंध में अधिकारियों और CBI को पत्र लिखे गए, लेकिन उनके अनुसार कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
इस मामले में 18 नवंबर 2022 को मुंबई की विशेष अदालत की ओर से दिया गया प्रदीप पांडे को दी गई सुरक्षा संबंधी आदेश भी महत्वपूर्ण है। आदेश के मुताबिक, प्रदीप पांडेय को मामले में उनकी गवाही पूरी होने तक राज्य के खर्च पर पुलिस सुरक्षा देने का निर्देश दिया गया था। पांडेय का आरोप है कि अदालत के इस आदेश के बावजूद उनकी सुरक्षा लगातार जारी नहीं रखी गई। उन्होंने बताया कि जुलाई से 12 सितंबर तक सुरक्षा नहीं थी और पुलिस आयुक्त को ईमेल भेजने के बाद 12 सितंबर को सुरक्षा दी गई, लेकिन बाद में फिर हटा ली गई।
पांडेय ने सुरक्षा हटाए जाने के मामले में स्थानीय विधायक पर भी आरोप लगाए। उनका दावा है कि यादव नाम के एक कनिष्ठ अधिकारी ने उनसे कहा था कि सुरक्षा हटाने का आदेश दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ज्ञानमूर्ति शर्मा ने स्थानीय विधायक की मुलाकात DGS Realty के ईश्वर शुक्ला से कराई थी और प्रयागराज महाकुंभ के दौरान विधायक जी के प्रवास की सारी व्यवस्थाओं में भी डीजीएस रियल्टी की भूमिका थी।
अब इस पूरे मामले में कई सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं। क्या प्रदीप पांडेय को अदालत के आदेश के अनुसार सुरक्षा दी गई थी? यदि सुरक्षा हटाई गई, तो इसके पीछे क्या कारण थे? पांडेय द्वारा लगाए गए धमकी और हमले के आरोपों पर संबंधित अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की? इन सवालों पर प्रशासन और पुलिस का पक्ष महत्वपूर्ण होगा। ज्ञानमूर्ति शर्मा तथा अन्य नामित व्यक्तियों का जवाब इस खबर में उपलब्ध नहीं है। मेट्रो दिनांक इस बात का पूर्णतः आश्वासन देता है की उनका पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाएगा। फिलहाल, प्रदीप पांडेय ने निष्पक्ष जांच, अपनी सुरक्षा और न्याय की मांग की है। देखते है शासन प्रशासन उन्हे फिर से सुरक्षा प्रदान करती है या कोर्ट के आदेश की ऐसे ही धज्जियां उड़ाती जाती रहेगी।
