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तेजाब पीड़ितों को मुआवजा, HC ने सरकार को लगाई फटकार

मुंबई
बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि महाराष्ट्र सरकार को बलात्कार एवं तेजाब हमला पीड़ितों को मुआवजा देने के मामलों में लाल फीताशाही और प्रक्रिया संबंधी तकनीकियों को कम करना चाहिए। न्यायमूर्ति आरएम बोर्डे और न्यायमूर्ति आरजी केतकर की खंडपीड ने उस वक्त नाराजगी जताई जब उसे पता चला कि वर्ष 2012 में तेजाब हमले की शिकार एक लड़की को मुआवजा नहीं दिया गया है और उसे चिकित्सकीय खर्च के लिए राज्य सरकार की मनोधैर्य योजना के तहत अधिकृत राशि भी नहीं मिली है। न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया है कि तीन सप्ताह बाद जब अगली सुनवाई हो, उससे पहले पीड़ित को 3 लाख रुपया मुआवजा दे दिया जाए। नोधैर्य योजना के तहत बलात्कार एवं तेजाब हमला पीड़ितों को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है। इसके अलावा उनका चिकित्सकीय खर्च भी सरकार वहन करती है। योजना में पीड़ितों को काउंसिलिंग और व्यायवसायिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का भी प्रावधान है। सरकारी वकील नेहा भिडे ने पीठ को बताया कि याचिकाकर्ता पीड़ित के चिकित्सकीय खर्च के लिए चार लाख रुपये की राशि रखी गई थी।

यह राशि उसे नहीं दी जा सकी क्योंकि पीड़ित अस्पताल का बिल जमा नहीं कर पाई थी। उसने (पीड़ित) बाद में बिल जमा कराया। अब हम पीड़ित का बयान दर्ज करने के लिए उसका पता नहीं लगा पा रहे हैं। इससे नाराज अदालत ने यह जानना चाहा कि आखिर पीड़ित का बयान दर्ज कराने की आवश्यकता क्यों है, जबकि वह पहले ही सभी बिल जमा करा चुकी है।

अदालत ने कहा कि सरकार को यह रकम सीधे संबंधित अस्पताल को भेज देनी चाहिए। इसके अलावा पीड़िता को मुआवजा मिलना चाहिए। न्यायमूर्ति बोर्डे ने कहा, क्या सरकार को नौकरशाही एवं प्रक्रिया संबंधी तकनीकियों को कम नहीं करना चाहिए । आप (सरकार) बेहद संवेदनहीन हैं। इस खास मामले में याचिकाकर्ता को शारीरिक यातना भी झेलनी पड़ी है। वह मुआवजे के लिए तीन साल से अदालत के चक्कर काट रही है।

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