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मलाड में बिल्डर से सवाल पूछना क्या अपराध?, DGS रियल्टी से जुड़े विवादों की रिपोर्टिंग के बाद पत्रकार के खिलाफ झूठी FIR

मुंबई। मलाड पूर्व में DGS रियल्टी से जुड़े पुनर्विकास विवादों, स्थानीय नागरिकों की शिकायतों, धार्मिक स्थलों को लेकर उठे सवालों और अब पत्रकार के खिलाफ पुलिस शिकायत के घटनाक्रम ने एक बार फिर क्षेत्र की राजनीति और पुनर्विकास व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। मेट्रो दिनांक के प्रधान संपादक दीनानाथ तिवारी ने आरोप लगाया है कि DGS रियल्टी से जुड़े मामलों की लगातार रिपोर्टिंग के बाद उन्हें दबाव में लाने, धमकाने और उनकी पत्रकारिता को प्रभावित करने की कोशिश की गई। उन्होंने भाजपा के जिला अध्यक्ष ज्ञानमूर्ति शर्मा, DGS रियल्टी के मालिक ईश्वरदेव शुक्ला तथा कुछ अन्य लोगों की कथित भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

दीनानाथ तिवारी के अनुसार, मेट्रो दिनांक ने वर्ष 2026 में DGS रियल्टी से संबंधित कई विवादों और स्थानीय निवासियों की शिकायतों को प्रमुखता से प्रकाशित किया।

25 जनवरी को निर्माण स्थल पर दीवार गिरने से दो लड़कियों के घायल होने की घटना सामने आई थी। इसके बाद पूर्व नगरसेवक विनोद मिश्रा द्वारा पुलिस चौकी पर विरोध जताने का मामला भी चर्चा में आया। 24 जून को कोकणी पाड़ा में निर्माण कार्य के दौरान सीमेंट नालियों में जाने और बारिश का पानी घरों में घुसने की शिकायत स्थानीय लोगों ने उठाई। वहीं, 6 अगस्त को कथित अवैध सेल्स ऑफिस पर बुलडोजर कार्रवाई की खबर सामने आई। 10 अगस्त को इस्लामपुरा एसआरए परियोजना को लेकर जाफर कमानी ने DGS रियल्टी और अजीत राव राणे पर आरोप लगाए थे।

अगस्त के दौरान कोकणी माता मंदिर, पुनर्विकास योजना और बुद्ध विहार के मंडप से संबंधित विवाद भी सामने आए। स्थानीय लोगों और संबंधित पक्षों ने धार्मिक स्थलों की स्थिति, पुनर्विकास की प्रक्रिया तथा कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए। 15 और 16 अगस्त को कोकणी माता मंदिर की योजना तथा सिद्धार्थ विकास मित्र मंडल के मंडप विवाद के समाधान से संबंधित घटनाक्रम की रिपोर्टिंग भी मेट्रो दिनांक ने की।

18 और 19 अगस्त को दिंडोशी पंचरत्न सोसायटी के निवासियों ने कथित फर्जी सोसायटी और 79 घरों पर कब्जे की आशंका को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इस मामले में ज्ञानमूर्ति शर्मा और नगरसेविका संगीता ज्ञानमूर्ति शर्मा का नाम लेते हुए सवाल उठाए। इस विवाद में विरोध करने वालों के खिलाफ महिलाओं के माध्यम से विनयभंग के मामले दर्ज कराने के आरोप भी लगाए गए।

20 अगस्त को सलीम मेमन ने DGS रियल्टी और अजीत राव राणे से जुड़े विवाद में 1.20 करोड़ रुपये को लेकर आरोप लगाए, जबकि 21 अगस्त को अजीत राव राणे का पक्ष भी प्रकाशित किया गया। इसके बाद शिवशक्ति कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी, तीन मंदिरों के कथित गायब होने, रास्ते बंद किए जाने और रानी सती मार्ग पर तोड़फोड़ से जुड़े आरोपों की रिपोर्टिंग सामने आई।

सितंबर में पूर्व नगरसेवक राजपति यादव ने DGS रियल्टी और भाजपा के बीच कथित सांठगांठ को लेकर आरोप लगाए। मकबूल कंपाउंड में घरों पर कब्जे की आशंका, एसआरए अधिकारियों की कथित मिलीभगत और इस्लामपुरा पुनर्विकास विवाद को लेकर भी शिकायतें सामने आईं। 22 सितंबर को नालासोपारा में पेड़ों की कटाई और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की खबर प्रकाशित हुई। 28 सितंबर को पद्मावती नगर कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के निवासियों ने लगभग 20 वर्षों से लंबित पुनर्विकास को लेकर DGS रियल्टी पर गंभीर आरोप लगाए।

6 अक्टूबर को मकबूल कंपाउंड में तीन मंदिरों और एक पुरानी बावड़ी को लेकर विवाद फिर चर्चा में आया। मौके पर पहुंचे प्रभाग समिति अध्यक्ष – हैदर असलम शेख ने कार्रवाई और बिल्डर को ब्लैकलिस्ट करने की मांग उठाई। कांग्रेस नेता देवव्रत चौधरी ने भी ज्ञानमूर्ति शर्मा और DGS रियल्टी के संबंधों को लेकर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि ज्ञानमूर्ति शर्मा का बिल्डर के साथ साझेदारी का संबंध है। 11 अक्टूबर को इसी परिसर की साइट से खुले बिजली के तारों का वीडियो सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे।

दीनानाथ तिवारी की शिकायत के मुताबिक, 16 अक्टूबर की रात नगरसेवक सिद्धार्थ शर्मा के गरबा उत्सव में उनकी पत्नी मंजू दीनानाथ तिवारी की मुलाकात मंजू अशोक तिवारी नामक महिला से हुई। आरोप है कि बातचीत के दौरान महिला ने कहा कि ज्ञानमूर्ति शर्मा जिले के अध्यक्ष हैं और DGS Realty के मालिक ईश्वर देव शुक्ला के पार्टनर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि “उन्हें उनकी औकात का पता नहीं है, उनके कई सांसदों और विधायकों से अच्छे संबंध हैं तथा वे जब चाहें, दीनानाथ तिवारी और विनोद मिश्रा को चुटकी बजाते ही गायब करवा सकते हैं”।

इस पर दीनानाथ तिवारी की पत्नी ने उससे पूछा कि “आपको क्या लेना-देना है और आप क्यों धमकी दे रही हैं? “ उन्होंने जवाब दिया, “चाहे धमकी समझो या सलाह, दीनानाथ तिवारी को समझा देना।”

17 अक्टूबर को दीनानाथ तिवारी पूर्व नगरसेवक विनोद मिश्रा के कार्यालय पहुंचे और धमकी के संबंध में शिकायत करने की बात कही। तिवारी के मुताबिक, संबंधित महिला को फोन किया गया और स्पीकर पर हुई बातचीत के दौरान महिला ने विनोद मिश्रा के सामने कथित तौर पर गाली-गलौज और धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया। दीनानाथ तिवारी का दावा है कि उस समय उन्होंने जवाब देने से परहेज किया। लेकिन जब कथित तौर पर महिला ने पत्रकारों के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करते हुए कहा कि पत्रकार पैसे लेकर किसी के भी खिलाफ छापते हैं, तब उन्होंने सवाल किया—“मैंने आपसे कब पैसे लिए? क्या मैंने कभी आपसे एक रुपये की चाय भी पी है?”
इसके बाद महिला ने उन्हें उनकी औकात दिखाने की बात कही। उनका आरोप है कि इसी विवाद के बाद उनके खिलाफ पुलिस में झूठी FIR दर्ज कराई गई। जिसे वे अपनी पत्रकारिता और DGS रियल्टी से संबंधित खबरों के कारण दबाव बनाने की कोशिश मानते हैं।

दीनानाथ तिवारी का कहना है कि महिला की शिकायत की जानकारी सामने आने से पहले ही उन्होंने अपनी शिकायत पुलिस आयुक्त, डीसीपी, दो एसीपी तथा कुरार और दिंडोशी पुलिस थानों तक पहुंचाई थी। उनके अनुसार, शुरुआत में उनकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में DGS रियल्टी से जुड़े लोगों और ज्ञानमूर्ति शर्मा के कथित हस्तक्षेप के कारण पुलिस पर दबाव बनाया गया।

तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि DGS रियल्टी के एक पीए और ज्ञानमूर्ति शर्मा के पीए अजय यादव के दिंडोशी पुलिस थाने पहुंचने के बाद बिना प्राथमिक जांच के उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। उन्होंने दावा किया कि पुलिस स्टेशन परिसर में पुलिस अधिकारियों के सामने अजय यादव और छह-सात अन्य लोगों ने उनके साथ अश्लील गाली-गलौज की, जान से मारने की धमकी दी और उनकी पत्रकारिता बंद कराने की बात कही।

DGS रियल्टी से जुड़े विभिन्न विवादों में ज्ञानमूर्ति शर्मा का नाम सामने आने के कारण उनकी कथित भूमिका को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। कुछ शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बिल्डर से जुड़े विवादों में वे कथित तौर पर मध्यस्थता या समझौते की भूमिका निभाते हैं। इसी आरोप के संदर्भ में कुछ लोग उन्हें तंज कसते हुए ‘DGS रियल्टी का मांडवली बादशाह’ कहते हैं।

कुछ शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि DGS रियल्टी या ज्ञानमूर्ति शर्मा से जुड़े मामलों पर खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकारों से कथित तौर पर संपर्क कर खबर रोकने अथवा मामला सुलझाने की कोशिश की जाती है। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना जरूरी है।

मेट्रो दिनांक ने भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व से मांग करती है कि वह अपने जिला अध्यक्ष से जुड़े आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करे। दीनानाथ तिवारी ने कथित धमकी और पुलिस स्टेशन परिसर में हुई घटना की जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

मेट्रो दिनांक का कहना है कि वह जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर DGS रियल्टी से जुड़े विवादों और ज्ञानमूर्ति शर्मा पर लगाए गए आरोपों से संबंधित दस्तावेजों तथा उपलब्ध साक्ष्यों को सार्वजनिक करेगा।

मेट्रो दिनांक की संपादकीय नीति स्पष्ट है—जहां विकास होगा, वहां विकास का स्वागत किया जाएगा; लेकिन जहां नागरिकों के अधिकारों, घरों, धार्मिक स्थलों, पुनर्विकास प्रक्रिया या सुरक्षा को लेकर सवाल उठेंगे, वहां जवाबदेही की मांग भी की जाएगी। पत्रकारिता का उद्देश्य सवाल पूछना है और उन सवालों का जवाब तथ्यों, दस्तावेजों तथा निष्पक्ष जांच के माध्यम से सामने आना चाहिए।

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