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पठानवाड़ी में कथित वसूली और धमकी के आरोपों से मचा विवाद

मुंबई। मालाड पूर्व के पठानवाड़ी में इन दिनों राजनीतिक रसूख, कथित वसूली और आम नागरिकों के साथ व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। वार्ड क्रमांक 44 के पूर्व नगरसेवक अहमद जमाल सौदागर ने भाजपा उत्तर-पश्चिम जिला अध्यक्ष ज्ञानमूर्ति शर्मा, वर्तमान नगरसेविका संगीता ज्ञानमूर्ति शर्मा और उनके पीए अजय यादव की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। सौदागर ने सीधे सवाल उठाया है कि क्या जनता ने जनप्रतिनिधियों को गरीबों की सेवा करने के लिए चुना है या फिर छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों पर कथित दबाव बनाने के लिए? उनका कहना है कि पठानवाड़ी में पहले शांति का माहौल था, लेकिन अब छोटे दुकानदारों, ठेलेवालों, नारियल विक्रेताओं और यहां तक कि अपने घर का निर्माण कराने वाले नागरिकों को भी कथित रूप से परेशान किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

अहमद जमाल सौदागर के आरोपों के मुताबिक, अजय यादव चाहे केलावाला हो, ठेलावाला हो या नारियल बेचकर अपने परिवार का गुजारा करने वाला गरीब व्यापारी, उसे कथित तौर पर परेशान किया जाता है और उससे पैसों की मांग की जाती है। इतना ही नहीं, उनका आरोप है कि कोई व्यक्ति अपने घर का निर्माण कर रहा हो या दो मंजिला मकान बना रहा हो, तो उसे भी कथित तौर पर नहीं बख्शा जाता और निर्माण के वर्गफुट के हिसाब से पैसे मांगने की शिकायतें सामने आती हैं। यदि ये आरोप सही हैं, तो सवाल सिर्फ कुछ व्यक्तियों की कार्यप्रणाली का नहीं, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों और सरकारी व्यवस्था की जवाबदेही का भी है। आखिर बीएमसी के अधिकार क्षेत्र में आने वाले निर्माण कार्यों में निजी व्यक्तियों या जनप्रतिनिधियों के सहयोगियों की भूमिका क्या है? निर्माण वैध है या अवैध, इसकी जांच करने का अधिकार बीएमसी के संबंधित विभाग और अधिकारियों के पास है। नियमानुसार नोटिस देना, जांच करना और कार्रवाई करना प्रशासन का काम है। फिर किसी पीए या राजनीतिक पदाधिकारी की ओर से नागरिकों पर कथित दबाव बनाने और पैसे मांगने की शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं? क्या अब मुंबई में अपने ही घर का निर्माण कराने के लिए आम नागरिकों को सरकारी नियमों के बजाय किसी राजनीतिक पदाधिकारी या उसके सहयोगी की कथित अनुमति और दबाव का सामना करना पड़ेगा?

अहमद जमाल सौदागर ने ज्ञानमूर्ति शर्मा, संगीता शर्मा और अजय यादव को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जनता ने उन्हें सेवा करने के लिए चुना है, लोगों को परेशान करने के लिए नहीं। उन्होंने साफ कहा कि जनप्रतिनिधियों को जनता के विश्वास का सम्मान करना चाहिए। गरीब व्यापारियों और आम नागरिकों के साथ सम्मान से पेश आना चाहिए, न कि उन्हें कथित रूप से डराने या पैसों के लिए परेशान करने की शिकायतों को जन्म देना चाहिए। इस पूरे विवाद में जिक्र उस वायरल वीडियो का भी हुआ, जिसमें नारियल विक्रेता और नगरसेविका संगीता ज्ञानमूर्ति शर्मा के पीए अजय यादव से जुड़ा विवाद दिखाई देता है। अहमद जमाल सौदागर ने कहा कि उन्होंने स्वयं यह वीडियो देखा है। उनका दावा है कि जब नारियल विक्रेता अपने मोबाइल फोन से घटना की रिकॉर्डिंग कर रहा था, तब कथित तौर पर उसे धमकाया गया। सौदागर के अनुसार, वीडियो में अजय यादव द्वारा कथित रूप से यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वीडियो बना लो और जो करना है कर लो। इस घटना पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि विधायक हो, नगरसेवक हो या किसी जनप्रतिनिधि का सहयोगी, किसी को भी किसी नागरिक को धमकाने, मारने या पीटने का अधिकार नहीं है। यदि कोई गरीब व्यक्ति अपने साथ हो रही घटना का सबूत रखने के लिए मोबाइल से वीडियो बना रहा है, तो आखिर उसे डराने की जरूरत क्यों पड़ती है? क्या आम नागरिक को अपनी बात रखने और अपने साथ होने वाली घटना का सबूत सुरक्षित रखने का भी अधिकार नहीं है?

सौदागर ने यह भी स्पष्ट किया कि पठानवाड़ी नाका से संजय नगर, इंद्रिया नगर और कुरार विलेज तक यदि किसी भी छोटे व्यापारी, फेरीवाले या आम नागरिक को कथित रूप से परेशान किया जाता है, तो वह स्वयं पुलिस थाने पहुंचकर अजय यादव के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की पहल करेंगे। उनका संदेश साफ है कि गरीबों की रोजी-रोटी पर कथित दबाव बनाने और आम नागरिकों को परेशान करने की शिकायतों को अब नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन सवाल केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। इस पूरे मामले ने भाजपा के संगठनात्मक नेतृत्व की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों के साथ भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच भी चर्चा है कि यदि पार्टी के किसी पदाधिकारी या उसके सहयोगी के खिलाफ लगातार गंभीर शिकायतें सामने आती हैं, तो संगठन की ओर से निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराई जाती? क्या पार्टी में पद मिलना जनता के प्रति जवाबदेही से ऊपर हो गया है?

भाजपा के कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं ने भी आरोपों की जांच और संगठनात्मक जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई है। उनका सवाल है कि जिला अध्यक्ष का पद संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने और जनता की सेवा करने के लिए होता है या स्थानीय स्तर पर बिल्डर और निर्माण संबंधी गतिविधियों में हस्तक्षेप करने के लिए? अब सवाल मुंबई भाजपा अध्यक्ष आशीष शेलार और महाराष्ट्र भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व से भी पूछा जा रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार में आम नागरिकों को प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा होना चाहिए, लेकिन यदि स्थानीय स्तर पर इस तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो उनकी जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। स्थानीय लोगों और भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं का सवाल है कि आखिर इन शिकायतों पर वरिष्ठ नेतृत्व की ओर से अब तक कोई स्पष्ट सार्वजनिक प्रतिक्रिया या कार्रवाई क्यों सामने नहीं आई? क्या पार्टी नेतृत्व को इन शिकायतों की जानकारी नहीं है या फिर शिकायतों के बावजूद संगठन कोई निर्णय लेने से बच रहा है? कार्यकर्ताओं के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या भाजपा में जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के लिए योग्य और अनुभवी कार्यकर्ताओं की कमी है, जो इतनी शिकायतों के बावजूद मौजूदा नेतृत्व को लेकर कोई स्पष्ट फैसला नहीं लिया जा रहा? इन सवालों का जवाब भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व को देना चाहिए, क्योंकि संगठन में पद और राजनीतिक प्रतिष्ठा के साथ जवाबदेही भी जुड़ी होती है।

अहमद जमाल सौदागर ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और शासन-प्रशासन से मांग की है कि ज्ञानमूर्ति शर्मा, संगीता ज्ञानमूर्ति शर्मा और अजय यादव के खिलाफ लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में अवैध वसूली, धमकी, अनियमितता या अधिकारों के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि जांच के नाम पर शिकायतों को ठंडे बस्ते में न डाला जाए और स्थानीय नागरिकों को न्याय मिले। अब पठानवाड़ी की जनता के सामने कई सवाल हैं—क्या गरीब नारियल विक्रेता और छोटे व्यापारियों की आवाज सुनी जाएगी? क्या अपने घर का निर्माण कराने वाले नागरिकों को कथित दबाव से राहत मिलेगी? क्या बीएमसी अपने अधिकार क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों पर स्पष्ट जवाब देगी? और सबसे महत्वपूर्ण, क्या भाजपा का मुंबई और महाराष्ट्र नेतृत्व अपने ही संगठन से जुड़े इन गंभीर आरोपों पर निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करेगा? जनता ने प्रतिनिधि चुने हैं, जनता पर हुकूमत करने का अधिकार नहीं दिया है। यदि किसी पदाधिकारी या उसके सहयोगी के खिलाफ शिकायतें सामने आती हैं, तो उसका जवाब देना और जांच का सामना करना भी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है। फिलहाल अहमद जमाल सौदागर के आरोपों ने पठानवाड़ी की स्थानीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि आरोपों पर संबंधित लोग क्या सफाई देते हैं और भाजपा का वरिष्ठ नेतृत्व इस मामले में क्या कदम उठाता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पूरे घटनाक्रम की जांच भी आवश्यक है। संबंधित व्यक्तियों को अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है। उनका आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।

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