विष्णु सालोणकर ने दी आंदोलन और अनशन की चेतावनी
मंदिर बचाने के लिए स्थानीय नागरिकों से एकजुट होने की अपील
मुंबई। मलाड पूर्व के कोकणीपाड़ा स्थित लगभग 75 वर्ष पुराने सार्वजनिक कोकणी माता मंदिर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस प्रोजेक्ट यानी सौरभ एसआरए सहकारी गृहनिर्माण संस्था के मुख्य प्रवर्तक विष्णु सालोणकर ने डीजीएस रियल्टी पर आरोप लगाया है कि मंदिर को तोड़ने की साजिश की जा रही है और इससे स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है। उन्होंने मंदिर के अस्तित्व और आस्था को बचाने के लिए क्षेत्र के नागरिकों से एकजुट होकर आगे आने की अपील की है।
सालोणकर ने चेतावनी दी है कि यदि सार्वजनिक मंदिर की रक्षा के लिए उचित कदम नहीं उठाए गए, तो वे जनता के समर्थन से उग्र आंदोलन करेंगे और अनशन पर भी बैठेंगे। उन्होंने इस विवाद को केवल एक निर्माण का मामला नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय बताया है। विष्णु सालोणकर के अनुसार, कोकणी माता मंदिर का विवाद उनकी सोसाइटी से संबंधित है। उन्होंने डीजीएस रियल्टी के मालिक ईश्वर शुक्ला पर आरोप लगाया कि मंदिर को लेकर 15 नवंबर 2024 से संबंधित कथित शर्तों और आश्वासनों का पालन नहीं किया जा रहा है। उनका दावा है कि यह एक सार्वजनिक मंदिर है, लेकिन कुछ लोगों ने स्वयं को मंदिर का मालिक बताते हुए बिल्डर को इसे तोड़ने के लिए लिखकर दे दिया है। विष्णु सालोणकर ने कोकणी माता मंदिर के संबंध में पहले हुई बैठक और 15 अगस्त को जनप्रतिनिधियों तथा अधिकारियों के दौरे का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, इस दौरान आमदार सुनील प्रभु, पूर्व नगरसेवक विनोद मिश्रा, गणपत वारीसे, प्रशांत कदम, सुनील गुजर और स्थानीय नगरसेवक अजीत राव राणे सहित कई लोग मौजूद थे। सालोणकर का दावा है कि उस दौरान आमदार सुनील प्रभु ने लोगों के सामने स्पष्ट रूप से कहा था कि पहले नए मंदिर का निर्माण किया जाएगा, उसके बाद उसमें कोकणी माता की स्थापना होगी और इसके बाद ही पुराने मंदिर को हटाया जाएगा। उनके अनुसार, बिल्डर ईश्वर शुक्ला ने भी उस समय इस बात पर सहमति जताई थी। अब मंदिर तोड़े जाने की कथित तैयारी को लेकर स्थानीय नागरिकों के बीच चिंता और नाराजगी की स्थिति बताई जा रही है। सालोणकर का कहना है कि यदि पहले दिए गए आश्वासनों के अनुसार मंदिर के संरक्षण और नए मंदिर के निर्माण की व्यवस्था नहीं की गई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे मंदिर बचाने के लिए एकजुट हों और सार्वजनिक धार्मिक स्थल के अस्तित्व की रक्षा के लिए आगे आएं।
उन्होंने पठानवाड़ी स्थित मकबूल कंपाउंड में तीन मंदिरों को कथित तौर पर रातों-रात तोड़े जाने और उनकी मूर्तियां गायब होने के मामले को भी उठाया। इस संबंध में उन्होंने डीजीएस रियल्टी के मालिक ईश्वर शुक्ला और उनके समर्थकों पर आरोप लगाए हैं। सालोणकर ने कहा कि मकबूल कंपाउंड में मंदिरों के गायब होने का मामला गंभीर है और इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने इस मामले में स्थानीय नगरसेविका संगीता ज्ञानमूर्ति शर्मा की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि संबंधित क्षेत्र नगरसेविका संगीत ज्ञानमूर्ति शर्मा के वार्ड में आता है, लेकिन मंदिरों के मामले में उनकी ओर से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने नगरसेविका के पति और भाजपा उत्तर पश्चिम जिलाध्यक्ष ज्ञानमूर्ति शर्मा पर भी बिल्डर का समर्थन करने का आरोप लगाया।
इस पूरे विवाद के बीच कुरार की कोकणी माता मंदिर बचाओ समिति के पदाधिकारियों की भूमिका पर भी नजरें टिकी हुई हैं। मंदिर को लेकर चल रहे विवाद में समिति की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं और स्थानीय नागरिकों की मांगों पर संबंधित पक्ष क्या रुख अपनाते हैं, यह आगे महत्वपूर्ण रहेगा।
इस मामले में मेट्रो दिनांक ने डीजीएस रियल्टी के मालिक ईश्वर शुक्ला और ज्ञानमूर्ति शर्मा से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। यदि बिल्डर या संबंधित पक्ष इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया देना चाहते हैं, तो वे मेट्रो दिनांक से संपर्क कर सकते हैं। उनका पक्ष भी समाचार में उचित स्थान के साथ प्रकाशित किया जाएगा। मेट्रो दिनांक का उद्देश्य मंदिर से जुड़े विवाद के सभी पक्षों को सामने लाना और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जनता तक जानकारी पहुंचाना है।
